हरिद्वार भूमि घोटाला: दो IAS अधिकारियों का निलंबन 6 महीने और बढ़ा

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हरिद्वार भूमि घोटाला: दो IAS अधिकारियों का निलंबन 6 महीने और बढ़ा
उत्तराखंड के चर्चित हरिद्वार भूमि घोटाले में आरोपी बनाए गए दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों, कर्मेंद्र सिंह और वरुण चौधरी को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। केंद्र सरकार ने दोनों अधिकारियों के निलंबन की अवधि अगले छह महीने के लिए बढ़ा दी है। इसके साथ ही दोनों अधिकारी अब नवंबर 2026 तक निलंबित रहेंगे।
गृह सचिव शैलेश बगौली ने पुष्टि की है कि केंद्र सरकार के आदेश के अनुसार दोनों अधिकारियों का निलंबन जारी रहेगा। 3 जून 2026 को उनके निलंबन का एक वर्ष पूरा हो गया था और समीक्षा के बाद बहाली की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन केंद्र ने जांच पूरी होने तक निलंबन बरकरार रखने का फैसला लिया।
क्या है मामला?
यह मामला हरिद्वार नगर निगम द्वारा वर्ष 2024 में करीब 33 बीघा भूमि की खरीद से जुड़ा है। आरोप है कि निकाय चुनाव के दौरान आचार संहिता लागू होने के बावजूद लगभग 54 करोड़ रुपये में जमीन खरीदी गई। जांच में सामने आया कि संबंधित भूमि के आसपास नगर निगम का कूड़ा डंप किया जाता था, जिससे उसकी बाजार कीमत काफी कम मानी जा रही थी।
आरोप है कि कृषि भूमि को धारा 143 के तहत परिवर्तित दिखाकर सरकारी धन से अत्यधिक मूल्य पर खरीदा गया। मामले के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने जांच बैठाई और प्रथम दृष्टया अनियमितताएं मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह, नगर आयुक्त वरुण चौधरी तथा तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह सहित कई अधिकारियों पर कार्रवाई की गई।
मनी ट्रेल पर अब भी सवाल
करीब 54 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले में सबसे बड़ा सवाल धन के प्रवाह (मनी ट्रेल) को लेकर बना हुआ है। विजिलेंस अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है, लेकिन विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस पूरे लेन-देन में किन-किन अधिकारियों, कर्मचारियों या अन्य व्यक्तियों की भूमिका रही।
विपक्षी दल और सामाजिक संगठन लगातार जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी संपत्ति और सार्वजनिक धन से जुड़े इतने बड़े मामले में पारदर्शिता आवश्यक है। वहीं सरकार का कहना है कि जांच और कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है तथा सभी तथ्यों को उचित समय पर सार्वजनिक किया जाएगा।
आगे क्या?
आईएएस अधिकारियों का निलंबन बढ़ाए जाने के बाद इसी मामले में निलंबित पीसीएस अधिकारी अजयवीर सिंह को भी निकट भविष्य में राहत मिलने की संभावना कम मानी जा रही है। उनके मामले की समीक्षा अभी लंबित है।
यह मामला उत्तराखंड के सबसे बड़े कथित भूमि घोटालों में गिना जा रहा है और इसकी जांच के निष्कर्षों पर प्रशासनिक एवं राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।