देशभर के छात्र आंदोलन के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, युवाओं के नाम लिखी भावुक चिट्ठी

खबरें शेयर करें -

देशभर के छात्र आंदोलन के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, युवाओं के नाम लिखी भावुक चिट्ठी
नई दिल्ली। देशभर में परीक्षा प्रणाली को लेकर जारी विवाद और छात्र आंदोलनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपने के साथ ही सोशल मीडिया पर दो पन्नों और करीब 575 शब्दों की एक चिट्ठी भी साझा की। इस पत्र में उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे की वजह बताते हुए देश के युवाओं, शिक्षा व्यवस्था और मौजूदा परिस्थितियों पर विस्तार से अपनी बात रखी।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में लिखा कि पिछले कई दशकों से उनका सार्वजनिक जीवन शिक्षा और युवाओं के हितों के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री के रूप में उनका प्रयास हमेशा यही रहा कि देश के प्रत्येक विद्यार्थी को पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था मिले। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें देश की सेवा का अवसर मिला, जिसके लिए वे सदैव कृतज्ञ रहेंगे।
उन्होंने अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए कहा कि हाल के दिनों में परीक्षा व्यवस्था को लेकर जिस तरह का माहौल बना, उससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा। उन्होंने लिखा कि सरकार ने परीक्षा से जुड़े मामलों में समयबद्ध कार्रवाई की, जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से जांच सौंपी और छात्रों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए आवश्यक निर्णय लिए। इसके बावजूद देश में ऐसा वातावरण बना जिसमें युवाओं के मन में भ्रम और अविश्वास पैदा करने की कोशिश की गई।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी चिट्ठी में दो स्थानों पर विशेष रूप से यह उल्लेख किया कि कुछ लोगों ने युवाओं को भ्रमित करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि उन्हें सबसे अधिक पीड़ा इस बात की है कि छात्रों की भावनाओं का राजनीतिक और अन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया। उनका मानना है कि देश के युवाओं को किसी भी प्रकार के भ्रम या भड़कावे का शिकार नहीं बनने देना चाहिए।
उन्होंने आगे लिखा कि उनका यह निर्णय किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं, बल्कि देश के विद्यार्थियों के भविष्य और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि किसी भी छात्र का भविष्य विवादों, कानूनी प्रक्रियाओं या राजनीतिक संघर्षों की भेंट चढ़े। उनका विश्वास है कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी है।
पत्र के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों, कर्मचारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और अपने सहयोगियों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि मंत्री पद छोड़ने के बाद भी वे देश, शिक्षा और युवाओं के हित में कार्य करते रहेंगे तथा राष्ट्र सेवा के अपने संकल्प को पहले की तरह जारी रखेंगे।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। पिछले कई दिनों से विभिन्न छात्र संगठन परीक्षा प्रणाली में सुधार, जवाबदेही तय करने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। ऐसे में उनके इस्तीफे को शिक्षा और राजनीति, दोनों दृष्टियों से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।