खौफ में वनग्राम! आधी रात हाथी ने तोड़ा घर, दीवार गिराकर खा गया गेहूं; आखिर कब जागेगा सिस्टम?

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खौफ में वनग्राम! आधी रात हाथी ने तोड़ा घर, दीवार गिराकर खा गया गेहूं; आखिर कब जागेगा सिस्टम?
नैनीताल। जनपद नैनीताल की किशनपुर रेंज के अंतर्गत रैखाल खत्ता वनग्राम में एक बार फिर जंगली हाथी का आतंक देखने को मिला। सोमवार देर रात एक जंगली हाथी ने गांव में घुसकर एक मकान पर हमला कर दिया। हाथी ने घर की दीवार तोड़ दी और भीतर रखे चार कट्टे गेहूं खा गया। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है और ग्रामीण पूरी रात भय के साए में जागने को मजबूर रहे।
जानकारी के अनुसार, जंगली हाथी देर रात आबादी वाले क्षेत्र में पहुंच गया। भोजन की तलाश में उसने एक मकान को निशाना बनाया और दीवार तोड़कर अंदर घुस गया। हाथी ने घर में रखा करीब चार कट्टे गेहूं खा लिया और काफी नुकसान पहुंचाया। गनीमत रही कि घटना के समय परिवार के सदस्य सुरक्षित रहे, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।
घटना की सूचना मिलते ही वनग्राम अध्यक्ष हीरा सिंह और बिष्ट प्रताप आर्य ने प्रशासन और वन विभाग को मामले से अवगत कराया। दोनों ने इस पूरी घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वनग्राम के लोगों को लंबे समय से जंगली जानवरों के हमलों का सामना करना पड़ रहा है। आए दिन हाथी, बाघ और अन्य वन्यजीव गांव में घुसकर फसलों, मकानों और पशुधन को नुकसान पहुंचाते हैं। कई मामलों में ग्रामीणों की जान भी जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि हर घटना के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचकर केवल औपचारिकताएं पूरी कर देते हैं, लेकिन न तो सुरक्षा के स्थायी इंतजाम किए जाते हैं और न ही पीड़ित परिवारों को समय पर उचित मुआवजा मिलता है। जनप्रतिनिधियों पर भी ग्रामीणों ने उपेक्षा का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन वनग्रामों की समस्याओं पर किसी का ध्यान नहीं जाता।
रैखाल खत्ता सहित किशनपुर रेंज के कई वनग्राम लंबे समय से मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। जंगल से सटे होने के कारण यहां अक्सर हाथियों की आवाजाही रहती है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि जंगलों में भोजन और प्राकृतिक आवास पर बढ़ते दबाव के कारण हाथी आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे ऐसी घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, वन विभाग और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि वनग्रामों की सुरक्षा के लिए प्रभावी और स्थायी व्यवस्था की जाए, हाथियों की आवाजाही रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय किए जाएं तथा पीड़ित परिवार को शीघ्र उचित मुआवजा दिया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सरकार और प्रशासन ने इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागों और शासन-प्रशासन की होगी।