

जिसने अपना घर आंदोलन को दिया, जिसने पूरी ज़िंदगी मेहनतकशों के नाम कर दी… ऐसे जननायक कॉमरेड निशान सिंह को 26 जुलाई को रुद्रपुर देगा लाल सलाम
रुद्रपुर। उत्तराखंड के जन आंदोलनों, मजदूर संघर्षों और शिक्षक आंदोलन की एक मजबूत आवाज़ हमेशा के लिए खामोश हो चुकी है, लेकिन उनके विचार और संघर्ष आज भी हजारों लोगों के दिलों में जीवित हैं। वरिष्ठ वामपंथी नेता, ऐक्टू (AICCTU) उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष, भाकपा (माले) लिबरेशन के पूर्व राज्य कमेटी सदस्य और लोकप्रिय शिक्षक कॉमरेड निशान सिंह (मास्टर साहब) की स्मृति में 26 जुलाई 2026 को नगर निगम हॉल, रुद्रपुर में भव्य श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी।
कार्यक्रम के अनुसार सुबह 11:30 बजे पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी, जबकि दोपहर 12:00 बजे श्रद्धांजलि सभा का आयोजन होगा। इसमें प्रदेशभर से किसान, मजदूर, शिक्षक, अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और जन आंदोलनों से जुड़े सैकड़ों लोग शामिल होकर अपने प्रिय कॉमरेड को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे।
कॉमरेड निशान सिंह केवल एक राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं थे, बल्कि जनसंघर्षों की जीवंत पहचान थे। रिटायर्ड हेडमास्टर होने के कारण लोग उन्हें प्यार से “मास्टर साहब” या “गुरुजी” कहते थे। उनका व्यक्तित्व बेहद सादा, बेबाक और जिंदादिल था। वे अपनी हाजिरजवाबी, स्पष्टवादिता और किस्सागोई के लिए दूर-दूर तक जाने जाते थे। उनके साथ बैठने वाला हर व्यक्ति उनके अनुभवों और संघर्षों से कुछ न कुछ सीखकर लौटता था।
शिक्षक होने के बावजूद उनका जीवन पूरी तरह मेहनतकश किसानों जैसा था। वे खेती-किसानी और पशुपालन से गहराई से जुड़े रहे। गाय-भैंस की सेवा करना, दूध निकालना और खेतों में काम करना उनके लिए सामान्य दिनचर्या का हिस्सा था। यही सादगी और श्रमशीलता उन्हें आम लोगों से जोड़ती थी।
उत्तराखंड में भाकपा (माले) के संगठन निर्माण की शुरुआत से ही उनका घर आंदोलनकारियों का आश्रय स्थल बन गया था। पार्टी के कार्यकर्ता जब भी किसी आंदोलन या संगठनात्मक काम से रुद्रपुर पहुंचते, उनके घर के दरवाजे हर समय खुले मिलते। भूखा कोई साथी उनके घर से वापस नहीं लौटता था। उनकी धर्मपत्नी ने भी इस जनसेवा की परंपरा को पूरे समर्पण से निभाया। संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि उन्होंने अपने घर का एक हिस्सा भाकपा (माले) के ऊधम सिंह नगर जिला कार्यालय के लिए स्थायी रूप से समर्पित कर दिया।
कॉमरेड निशान सिंह ने अपने जीवन का हर पल मजदूरों, किसानों, शिक्षकों और समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई में लगाया। वे भाकपा (माले) लिबरेशन के पूर्व राज्य कमेटी सदस्य, ऐक्टू उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष और उत्तराखंड प्राथमिक शिक्षक यूनियन के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे। उन्होंने कभी पद या प्रतिष्ठा के लिए नहीं, बल्कि विचार और जनहित के लिए संघर्ष किया।
उनके परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटियां और एक पुत्र हैं। उनकी पुत्री कॉमरेड अमनदीप कौर भाकपा (माले) की राज्य कमेटी सदस्य होने के साथ-साथ उत्तराखंड बार काउंसिल की सदस्य भी हैं और अपने पिता की जनपक्षधर विरासत को आगे बढ़ा रही हैं।
कॉमरेड निशान सिंह के निधन के बाद पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई। किसान संगठनों, मजदूर यूनियनों, शिक्षक संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मेहनतकश समाज की आवाज़ बुलंद करने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। उनके जाने से जन आंदोलनों ने अपना एक अनुभवी मार्गदर्शक और संघर्षशील साथी खो दिया है।
26 जुलाई को आयोजित होने वाली श्रद्धांजलि सभा केवल एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं होगी, बल्कि उस जननायक को सामूहिक नमन होगा जिसने अपना घर संगठन को, अपना समय समाज को और अपना पूरा जीवन मेहनतकश जनता के संघर्षों को समर्पित कर दिया।
कॉमरेड निशान सिंह का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष, सादगी, प्रतिबद्धता और जनसेवा की प्रेरणा बना रहेगा।



