Galgotias University की इंटरनेशनल फजीहत: रोबोट रिसर्च से चीन कनेक्शन तक, और अब प्रोफेसर पर ठीकरा।

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Galgotias University की इंटरनेशनल फजीहत: रोबोट रिसर्च से चीन कनेक्शन तक, और अब प्रोफेसर पर ठीकरा।


रुद्रपुर -गलगोटिया यूनिवर्सिटी में कथित एआई रोबोट प्रोजेक्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक चर्चा का विषय बन गया है। विश्वविद्यालय से जुड़े एक रोबोट डॉग/एआई मशीन को उन्नत शोध और स्वदेशी तकनीकी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसे कुछ मंचों पर उच्चस्तरीय रिसर्च प्रोजेक्ट बताकर प्रमोट किया गया। इस प्रचार के बाद जब तकनीकी समुदाय और सोशल मीडिया पर जांच-पड़ताल शुरू हुई तो दावा किया गया कि जिस मशीन को अत्याधुनिक स्वनिर्मित शोध का परिणाम बताया जा रहा था, वह वास्तव में चीन से लगभग तीन लाख रुपये में आयातित उपकरण है।

इस खुलासे के बाद विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और शैक्षणिक दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे। आलोचकों का कहना है कि यदि आयातित मशीन को स्वदेशी शोध उपलब्धि की तरह प्रस्तुत किया गया, तो यह अकादमिक ईमानदारी के मानकों पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। वहीं प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में प्रोफेसर नेहा सिंह के बयान या प्रस्तुति को व्यक्तिगत मत बताते हुए संस्थान ने खुद को अलग दिखाने की कोशिश की है और स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मानकों के प्रति प्रतिबद्ध है।

मामले के सार्वजनिक होने के बाद छात्र समुदाय और बाहरी विशेषज्ञों ने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच और तथ्यात्मक स्पष्टीकरण की मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्रचार, प्रस्तुति और वास्तविक स्रोत के बीच अंतर है तो इसकी जिम्मेदारी केवल एक व्यक्ति पर नहीं डाली जा सकती, बल्कि संस्थागत स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। फिलहाल यह प्रकरण न केवल एक तकनीकी दावे की सच्चाई का प्रश्न बन गया है, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता, शोध नैतिकता और ब्रांड निर्माण की संस्कृति पर भी व्यापक बहस छेड़ रहा है।