

कानून की तार काटता शिक्षा का ठेकेदार: कांग्रेस नेता व स्कूल संचालक सुमित राय पर ‘बिजली चोरी’ का संगीन आरोप, FIR दर्ज।
रुद्रपुर- रुद्रपुर में बिजली चोरी के खिलाफ चले सख्त अभियान के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा, राजनीति और कानून—तीनों पर एक साथ गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस से जुड़े नेता और स्वयं को शिक्षा से जोड़कर प्रस्तुत करने वाले स्कूल संचालक सुमित राय पर विद्युत अधिनियम के तहत कथित तौर पर गंभीर आरोप सामने आए हैं। 30 जनवरी 2026 को विद्युत वितरण उपखण्ड रुद्रपुर प्रथम और सतर्कता इकाई कुमाऊँ क्षेत्र हल्द्वानी की संयुक्त टीम ने चेकिंग के दौरान शिक्षा के नाम पर संचालित बताए जा रहे परिसर में अवैध रूप से बिजली उपयोग किए जाने का खुलासा होने का दावा किया है।


अवर अभियंता कुलदीप सिंह के नेतृत्व में अवर अभियंता परवीन सैनी, लाइन कर्मी विपिन सक्सेना और सतर्कता इकाई के अमित चन्द्र आर्या विभागीय अनुबंध वाहनों से ट्रांजिट कैम्प, वार्ड नंबर–2 राय कॉलोनी स्थित परिसर पर पहुंचे। मौके पर परिसर स्वामी सुमित राय पुत्र स्वर्गीय वीरेंद्र राय स्वयं उपस्थित बताए गए। जांच के दौरान कथित अवैध केबिल उतरवाकर कब्जे में ली गई और मौके पर ही विधिवत चेकिंग रिपोर्ट तैयार कर फर्द बनाई गई, जिसे गवाहों के समक्ष पढ़कर सुनाया गया।
फर्द के अनुसार मौके से लगभग 12 मीटर लंबी 2-कोर केबिल बरामद होने का उल्लेख है, जिससे करीब 1.813 किलोवाट विद्युत भार अवैध रूप से उपयोग किए जाने की बात कही गई है। बरामद केबिल को कपड़े में रखकर सील किया गया, नमूना मोहर ली गई और पूरी कार्यवाही गवाहों की मौजूदगी में संपन्न कराई गई। इसके बाद बरामद सामग्री और नमूना मोहर को अवर अभियंता कार्यालय अथवा 33 केवी उपसंस्थान में जमा कराने की प्रक्रिया दर्ज की गई।
तहरीर में स्पष्ट किया गया है कि यह कृत्य विद्युत अधिनियम की धारा 135 के अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है और संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज किए जाने की संतूती दर्ज की गई है। सीसीटीएनएस में फर्द की नकल शब्दशः टाइप कराए जाने का प्रमाण भी पुलिस स्तर पर दर्ज होने की बात कही गई है, जिससे कार्रवाई की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने का दावा किया गया है।
इस कथित प्रकरण के सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। सवाल यह उठ रहे हैं कि जो व्यक्ति शिक्षा और नैतिकता का चेहरा बनने का दावा करता है, वही यदि कानून के उल्लंघन के आरोपों में घिरता है तो समाज को क्या संदेश जाता है। खास तौर पर तब, जब मामला शिक्षा के मंदिर में बिजली चोरी जैसे गंभीर अपराध से जुड़ा बताया जा रहा हो। अब सभी की निगाहें पुलिस द्वारा दर्ज की जाने वाली प्राथमिकी और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि यह मामला आरोपों तक सीमित रहता है या कानून की कसौटी पर आगे बढ़ता है।
