खबर का वार, अवैध कब्जे पर प्रहार: प्रीत विहार में सीलिंग भूमि पर चला प्रशासन का बुलडोजर, स्कूल संचालक पर कसा कानूनी शिकंजा

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खबर का वार, अवैध कब्जे पर प्रहार: प्रीत विहार में सीलिंग भूमि पर चला प्रशासन का बुलडोजर, स्कूल संचालक पर कसा कानूनी शिकंजा


रुद्रपुर। जनपद ऊधम सिंह नगर के जिला मुख्यालय रुद्रपुर के फाजलपुर मेहरौला स्थित प्रीत विहार कॉलोनी में सीलिंग की सरकारी भूमि पर लंबे समय से चल रहे अवैध कब्जे और निर्माण पर आखिरकार प्रशासन का सख्त डंडा चल गया।

हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेशों और सीलिंग एक्ट के प्रावधानों के तहत जिस जमीन पर किसी भी प्रकार के निर्माण, बिजली कनेक्शन या अन्य गतिविधियों पर रोक थी, वहां खुलेआम हो रहे निर्माण कार्य को लेकर लगातार उठ रही आवाजों और मीडिया में प्रकाशित खबरों के बाद प्रशासन हरकत में आया और महज 24 घंटे के भीतर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दे दिया।

समाचार इंडिया 1, द वॉयस ऑफ इंडिया न्यूज़ और अन्य  माध्यमों द्वारा इस मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद जिला प्रशासन, नगर निगम, विद्युत विभाग और शिक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरे अवैध निर्माण को सीज कर दिया और विवादित भूखंड को सरकारी कब्जे में ले लिया। कार्रवाई के दौरान एडीएम पंकज उपाध्याय, एसडीएम मनीष बिष्ट, नगर आयुक्त शिप्रा जोशी और तहसीलदार दिनेश कुटौला समेत भारी संख्या में प्रशासनिक अमला मौजूद रहा, जिसने पहले राजस्व विभाग से भूमि की पैमाइश कराई और फिर पूरे क्षेत्र को सील करते हुए स्पष्ट कर दिया कि अब यह जमीन पूरी तरह प्रशासन के नियंत्रण में है।

यह वही जमीन है जिस  स्कूल संचालक द्वारा करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण कराए जाने के आरोप लग रहे थे। कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और अब तक बेखौफ जारी निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो गया है। प्रशासन ने न केवल अवैध निर्माण को रोका, बल्कि संबंधित स्कूल को भी जांच के घेरे में ले लिया है।

प्राथमिक जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि विद्यालय का भवन विकास प्राधिकरण से स्वीकृत नक्शे के बिना ही खड़ा किया गया था। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बिना नक्शा पास कराए विद्यालय का संचालन आखिर कैसे किया जा रहा था और उसे मान्यता किन आधारों पर दी गई। इस गंभीर पहलू को देखते हुए एडीएम पंकज उपाध्याय ने विद्यालय के सभी दस्तावेजों, भूमि अभिलेखों और भवन मानचित्र की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं, वहीं शिक्षा विभाग को भी इस मामले में गहन पड़ताल करने के निर्देश दिए गए हैं।

दिलचस्प बात यह भी सामने आई कि विद्युत विभाग पहले ही इस अवैध निर्माण को बिजली कनेक्शन देने से इनकार कर चुका था, इसके बावजूद निर्माण कार्य का जारी रहना विभागीय समन्वय की कमी को उजागर करता है। हालांकि अब संयुक्त कार्रवाई के बाद प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अवैध कब्जों और निर्माणों के खिलाफ किसी भी स्तर पर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई का खुले तौर पर स्वागत किया है और इसे निष्पक्ष प्रशासन की दिशा में एक सख्त और जरूरी कदम बताया है। लोगों का कहना है कि आम नागरिकों पर त्वरित कार्रवाई करने वाला प्रशासन अब बड़े मामलों में भी समान सख्ती दिखा रहा है, जिससे उसकी विश्वसनीयता और मजबूत हुई है।

फिलहाल यह पूरी कार्रवाई मीडिया में उजागर हुए मामले का सीधा असर मानी जा रही है, जिसने प्रशासन को त्वरित निर्णय लेने के लिए मजबूर किया। अब सबकी नजरें आगामी जांच पर टिकी हैं कि संबंधित स्कूल संचालक के खिलाफ आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है और क्या इस तरह के अवैध कब्जों पर स्थायी रूप से रोक लगाई जा सकेगी या नहीं।