46 साल की दोस्ती पर सियासी दरार: तिलक राज बेहड़ के जन्मदिन के बाद बलवंत अरोड़ा ‘बल्लू’ का ऐलान—अब हर रिश्ते को टाटा-बाय-बाय।

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46 साल की दोस्ती पर सियासी दरार: तिलक राज बेहड़ के जन्मदिन के बाद बलवंत अरोड़ा ‘बल्लू’ का ऐलान—अब हर रिश्ते को टाटा-बाय-बाय।


रुद्रपुर -किच्छा के विधायक और पूर्व मंत्री तिलक राज बेहड़ ने 69वां जन्मदिन मना कर भले ही अपने राजनीतिक कद और जनसमर्थन का प्रदर्शन किया हो, लेकिन इसी दौरान उनके सबसे करीबी माने जाने वाले 46 साल पुराने दोस्त और समधि, व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष बलवंत अरोड़ा उर्फ बल्लू का उनसे पूरी तरह अलग हो जाना सियासी गलियारों में बड़ी हलचल का कारण बन गया है। वर्षों से चली आ रही दोस्ती और पारिवारिक रिश्तों में आई दरार अब पूरी तरह टूटन में तब्दील होती दिखाई दे रही है।

बीते कुछ दिनों में घटित घटनाक्रम और तिलक राज बेहड़ की कार्यशैली को लेकर बलवंत अरोड़ा बल्लू लंबे समय से भीतर ही भीतर आहत बताए जा रहे थे। यही वजह रही कि वे तिलक राज बेहड़ के जन्मदिवस कार्यक्रम से भी पूरी तरह दूर नजर आए। अब उन्होंने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सोशल मीडिया के जरिए अपना पक्ष सार्वजनिक कर दिया है और साफ शब्दों में कहा है कि आगे वह तिलक राज बेहड़ से किसी भी प्रकार का संबंध नहीं रखना चाहते।

अपने बयान में बलवंत अरोड़ा बल्लू ने भावुक लेकिन बेहद स्पष्ट लहजे में कहा कि हालिया घटनाओं ने उन्हें मानसिक रूप से गहरा दुख पहुंचाया है। इसके बाद उन्होंने परिवार की सलाह को सर्वोपरि मानते हुए स्वतंत्र रूप से जीवन जीने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी दो टूक कह दिया कि भविष्य में तिलक राज बेहड़ के किसी भी चुनाव में न तो वे समर्थन करेंगे और न ही किसी तरह की भूमिका निभाएंगे। उनके इस बयान को सियासी हलकों में तिलक राज बेहड़ के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

करीब साढ़े चार दशक पुरानी दोस्ती और पारिवारिक रिश्तों का इस तरह सार्वजनिक रूप से टूट जाना अब कई सवाल खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अपनों से बढ़ती यह दूरी तिलक राज बेहड़ की राजनीति पर कितना असर डालेगी। जन्मदिन के जश्न के बीच सामने आया यह घटनाक्रम साफ संकेत दे रहा है कि सियासत में शक्ति प्रदर्शन जितना अहम होता है, उतना ही अहम भीतरखाने रिश्तों का संतुलन भी, क्योंकि इन्हीं रिश्तों की टूटन कई बार भविष्य की राजनीति की दिशा तय कर देती है।