34 यात्रियों की जान बचाकर खुद कुर्बान हो गए रोडवेज चालक बेनीराम, चंपावत हादसे में दिखाई अद्भुत बहादुरी

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34 यात्रियों की जान बचाकर खुद कुर्बान हो गए रोडवेज चालक बेनीराम, चंपावत हादसे में दिखाई अद्भुत बहादुरी
चंपावत। बुधवार तड़के चंपावत जिले के लोहाघाट क्षेत्र में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में उत्तराखंड रोडवेज के चालक बेनीराम थ्वाल ने अपनी जान की परवाह किए बिना 34 यात्रियों की जिंदगी बचाकर असाधारण साहस का परिचय दिया। यात्रियों के लिए वह किसी देवदूत से कम साबित नहीं हुए, लेकिन दुर्भाग्यवश खुद अपनी जान नहीं बचा सके।
जानकारी के अनुसार टनकपुर डिपो की रोडवेज बस संख्या यूके 07 पी ए 3122 बुधवार सुबह करीब साढ़े तीन बजे धारचूला से टनकपुर के लिए रवाना हुई थी। बस में 34 यात्री सवार थे। बस को स्वाला बड़ोली निवासी 40 वर्षीय अनुभवी चालक बेनीराम थ्वाल चला रहे थे।
बताया जा रहा है कि लोहाघाट के निकट राइकोट क्षेत्र में पहुंचने पर अचानक बस के ब्रेक ने काम करना बंद कर दिया, जिससे वाहन का संतुलन बिगड़ने लगा। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए चालक बेनीराम ने घबराने के बजाय पूरी सूझबूझ और साहस के साथ बस को नियंत्रित करने का प्रयास किया। यात्रियों में चीख-पुकार मची हुई थी, लेकिन चालक लगातार बस को खाई में गिरने से बचाने की कोशिश करता रहा।
इसी दौरान बस सड़क किनारे स्थित एक पहाड़ी से टकरा गई, जिससे उसकी रफ्तार कुछ कम हुई और बड़ा हादसा टल गया। माना जा रहा है कि यदि चालक ने समय रहते यह निर्णय नहीं लिया होता तो बस गहरी खाई में गिर सकती थी और बड़ी जनहानि हो सकती थी।
हालांकि बस को नियंत्रित करने की जद्दोजहद के बीच सड़क किनारे पत्थरों से टकराने पर चालक साइड की खिड़की खुल गई। इसी दौरान चालक बेनीराम बस से बाहर जा गिरे और बस के पहिये के नीचे दब गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
सूचना मिलने पर पुलिस और स्थानीय ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचे तथा राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। गंभीर रूप से घायल चालक को बचाने के प्रयास किए गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उनकी मौत हो गई।
प्रारंभिक आशंका बस के ब्रेक फेल होने की जताई जा रही है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं हादसे की जांच शुरू कर दी गई है।
बेनीराम की बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। अपने अंतिम क्षणों तक यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले इस चालक ने कर्तव्य पालन की ऐसी मिसाल पेश की है जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। 34 यात्रियों की जान बचाने वाले बेनीराम आज भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी वीरता और बलिदान हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे।