

दलजीत सिंह पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई का श्रमिक संगठनों ने किया विरोध, प्रशासन पर मजदूरों की आवाज दबाने का आरोप


रुद्रपुर। श्रमिक संयुक्त मोर्चा ऊधमसिंह नगर ने अपने कार्यकारी अध्यक्ष दलजीत सिंह के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई गुंडा एक्ट की कार्रवाई और जिला बदर करने की चेतावनी का कड़ा विरोध किया है। इस संबंध में शनिवार को रुद्रपुर स्थित आहुजा धर्मशाला में प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रशासन की कार्रवाई को मजदूर हितों के खिलाफ बताया।
मोर्चा अध्यक्ष दिनेश तिवारी ने कहा कि दलजीत सिंह को जिन चार मुकदमों के आधार पर नोटिस जारी किया गया है, उनमें से एक मामले में उन्हें पहले ही दोषमुक्त किया जा चुका है, जबकि दूसरे मामले पर उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा स्थगन आदेश जारी है। इसके बावजूद इन मामलों को रिपोर्ट में शामिल कर गुंडा एक्ट की कार्रवाई शुरू करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और न्यायालयों के आदेशों की अनदेखी है। उन्होंने कहा कि बाकी मामलों में भी अदालत से जमानत मिल चुकी है, जिससे प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।
मोर्चा के प्रचार मंत्री हरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने 11 मई 2026 को जारी नोटिस करीब एक महीने बाद जून में सौंपा, जबकि नोटिस में दलजीत सिंह को क्षेत्र की शांति के लिए खतरा बताया गया है। उन्होंने कहा कि नोटिस में उनका निवास स्थान इंटरार्क कंपनी दर्शाया गया है, जो तथ्यात्मक रूप से गलत है और पूरी कार्रवाई मजदूर नेताओं को निशाना बनाने की साजिश का हिस्सा प्रतीत होती है।
इंटरार्क मजदूर संगठन के महामंत्री सौरभ कुमार ने कहा कि हर वर्ष जुलाई में कंपनी में वेतन समझौता होता है और उससे ठीक पहले दलजीत सिंह को नोटिस जारी किया जाना संदेह पैदा करता है। उनका आरोप है कि यह कार्रवाई वेतन समझौते और मजदूरों के मुद्दों से ध्यान भटकाने के उद्देश्य से की गई है।
सीएसटीयू के केंद्रीय महासचिव मुकुल तथा इंकलाबी मजदूर केंद्र के शहर सचिव कैलाश भट्ट ने कहा कि नोटिस ऐसे समय में जारी किया गया जब सिडकुल पंतनगर और हरिद्वार में न्यूनतम वेतन समेत श्रमिक मुद्दों को लेकर आंदोलन चल रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम श्रमिक आंदोलनों को कमजोर करने और मजदूरों की आवाज दबाने के लिए उठाया गया है।
प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि दलजीत सिंह के खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई वापस नहीं ली गई तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से पूरे उत्तराखंड में विस्तारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की होगी।
प्रेस वार्ता में दलजीत सिंह, दिनेश चंद्र, मुकुल, कैलाश भट्ट, हरेन्द्र सिंह, सौरभ कुमार, ह्रदयेश कुमार, निरंजन लाल, गोपाल सिंह गौतम सहित कई श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
