दुर्भावना से दायर याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, ऊधम सिंह नगर केबनवारी सिंह और दलजीत सिंह दो राशन डीलरों पर 20 हजार रुपये का जुर्माना

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दुर्भावना से दायर याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, ऊधम सिंह नगर केबनवारी सिंह और दलजीत सिंह दो राशन डीलरों पर 20 हजार रुपये का जुर्माना
नैनीताल हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों के खिलाफ दुर्भावना से प्रेरित याचिका दायर करने के मामले में ऊधम सिंह नगर के दो सस्ता गल्ला विक्रेताओं बनवारी सिंह और दलजीत सिंह पर कड़ा रुख अपनाते हुए उनकी विशेष अपील खारिज कर दी है। साथ ही दोनों पर संयुक्त रूप से 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अदालत ने निर्देश दिया कि यह राशि एक सप्ताह के भीतर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराई जाए।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एकलपीठ के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें राशन डीलरों की रिट याचिका पहले ही खारिज की जा चुकी थी। इस याचिका में दोनों डीलरों ने क्षेत्रीय राशन अधिकारी आशुतोष भट्ट और विनोद चंद्र तिवारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने तथा उनका कुमाऊं मंडल से बाहर तबादला किए जाने की मांग की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि दोनों राशन डीलरों की दुकानों के लाइसेंस निलंबित अथवा निरस्त किए जा चुके थे। उनका आरोप था कि अधिकारियों ने कथित रूप से रिश्वत की मांग पूरी नहीं होने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की। इस संबंध में उन्होंने मुख्य सचिव को भी शिकायत भेजने का दावा किया था।
हालांकि, अदालत ने पाया कि दोनों अपीलकर्ताओं का वास्तविक विवाद राशन वितरण के कमीशन के भुगतान से जुड़ा था। एक मामले में 11,277 रुपये तथा दूसरे में 2,45,861 रुपये के भुगतान को लेकर विवाद था, लेकिन इस विषय में उन्होंने पहले किसी सक्षम प्राधिकारी या न्यायिक मंच पर कोई राहत नहीं मांगी थी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि प्रस्तुत याचिका अधिकारियों पर दबाव बनाने और लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई का प्रतिशोध लेने के उद्देश्य से दायर की गई थी। अदालत ने यह भी कहा कि लाइसेंस निलंबन को चुनौती देने वाली उनकी मूल याचिका पहले से लंबित है, जहां वे अपने कानूनी तर्क रख सकते हैं, लेकिन दुर्भावना से प्रेरित ऐसी याचिकाएं न्यायालय स्वीकार नहीं कर सकता। इसी आधार पर विशेष अपील खारिज करते हुए जुर्माना लगाया गया।
इसी दौरान नैनीताल हाईकोर्ट ने हरिद्वार निवासी जगपाल सिंह द्वारा दायर अवमानना याचिका पर भी सुनवाई की। याचिका में आरोप लगाया गया कि राज्य सूचना आयोग के आदेश के बावजूद सचिव सिंचाई विभाग ने शिकायत पर निर्धारित समय में निर्णय नहीं लिया। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने प्रथम दृष्टया आदेश की अवहेलना मानते हुए सचिव सिंचाई विभाग को अवमानना का नोटिस जारी किया और चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।
यह मामला सूचना के अधिकार से संबंधित शिकायत से जुड़ा है, जिसमें राज्य सूचना आयोग ने मुख्य सचिव को जांच कराने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि आयोग के आदेश का पालन नहीं किया गया और हाईकोर्ट के पूर्व निर्देशों के बावजूद शिकायत पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। अब अदालत ने सचिव सिंचाई विभाग से जवाब तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए चार सप्ताह का समय निर्धारित किया है।