

हांगकांग में डॉ. राधा वाल्मीकि का सम्मान, शोध-पत्र वाचन से बटोरी सराहना


हिंदी के वैश्विक प्रचार-प्रसार को समर्पित हांगकांग में आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में शिक्षाविद एवं शोधकर्ता डॉ. राधा वाल्मीकि ने “वैश्विक विकास में संस्कृति और विज्ञान की भूमिका” विषय पर अपना शोध-पत्र प्रस्तुत कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई। सेमिनार में भारत के विभिन्न राज्यों के प्रोफेसरों, शोधार्थियों, साहित्यकारों तथा कई देशों के शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने भाग लिया।
अपने शोध-पत्र में डॉ. वाल्मीकि ने संस्कृति और विज्ञान को मानव सभ्यता के विकास के दो महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए कहा कि संस्कृति समाज को नैतिक मूल्य, मानवीय संवेदनाएं और सकारात्मक दिशा प्रदान करती है, जबकि विज्ञान जीवन को अधिक सरल, सुगम और सुविधाजनक बनाने के लिए तार्किक आधार उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान ने मानव जीवन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है और अंतरिक्ष तक की यात्रा संभव बनाई है।
उन्होंने अपने विचार रखते हुए कहा कि विज्ञान और संस्कृति का संतुलित समन्वय ही समावेशी एवं शांतिपूर्ण भविष्य का आधार बन सकता है। वैज्ञानिक सोच को मानवीय संवेदनाओं से जोड़कर ही नई पीढ़ी के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को रचनात्मक दिशा दी जा सकती है। उनके अनुसार विज्ञान और संस्कृति का संयोजन आत्मनिर्भर और समावेशी वैश्विक विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।
डॉ. वाल्मीकि ने यह भी कहा कि समय के साथ विज्ञान और संस्कृति दोनों में कुछ कमियां और विकृतियां उत्पन्न हो जाती हैं। विज्ञान की कमियों को तकनीकी और व्यावहारिक स्तर पर सुधारा जा सकता है, लेकिन सामाजिक कुरीतियां, कठोर परंपराएं और जाति-आधारित भेदभाव जैसी सांस्कृतिक विकृतियां लंबे समय तक समाज को प्रभावित करती रहती हैं। उन्होंने इन समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक सोच और सुधारवादी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के उपरांत उनके विचारों की उपस्थित विद्वानों ने सराहना की। शोध-पत्र वाचन के बाद उन्हें स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही शैक्षिक भ्रमण के संयोजक मनीष सुंदरियाल द्वारा उन्हें “इंस्पायरिंग ट्रैवलर अवार्ड” से भी सम्मानित किया गया।
विशेष उल्लेखनीय बात यह है कि ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी के कारण लगभग 75 प्रतिशत दृष्टि खो देने के बावजूद डॉ. राधा वाल्मीकि अपने दृढ़ संकल्प और बुलंद हौसले के बल पर लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रही हैं और देश-विदेश में अपनी पहचान बना रही हैं।
अपनी इस उपलब्धि पर उन्होंने सेमिनार के संयोजक मनोज कुमार तथा मनीष सुंदरियाल का आभार व्यक्त किया। स्वदेश लौटने पर परिजनों, शुभचिंतकों और सहयोगियों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
