

54 करोड़ के हरिद्वार भूमि घोटाले में बड़ा धमाका: IAS वरुण चौधरी की बर्खास्तगी की संस्तुति, पूर्व DM कर्मेंद्र सिंह पर भी गिरी गाज


देहरादून/हरिद्वार। उत्तराखंड की धामी सरकार ने हरिद्वार नगर निगम के चर्चित ₹54 करोड़ भूमि खरीद घोटाले में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए सख्त संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विजिलेंस जांच में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद सरकार ने तत्कालीन नगर आयुक्त और आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी की सेवा से बर्खास्तगी की संस्तुति कर दी है, जबकि तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह को मेजर पनिशमेंट देने का फैसला लिया गया है।
सरकार के इस फैसले को उत्तराखंड प्रशासनिक इतिहास की सबसे कठोर कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। विजिलेंस की रिपोर्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपे जाने के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हुई और दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मुकदमे दर्ज करने की अनुमति भी दे दी गई।
जांच में सामने आया कि हरिद्वार नगर निगम द्वारा वर्ष 2024 में 33 बीघा भूमि लगभग ₹54 करोड़ में खरीदी गई थी। यह खरीद उस समय की गई जब निकाय चुनावों के कारण आचार संहिता लागू थी और नगर निगम का प्रशासनिक नियंत्रण तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी के पास था। बाद में जब इस सौदे की जांच हुई तो भूमि की वास्तविक कीमत और खरीद मूल्य में भारी अंतर पाए जाने के आरोप सामने आए।
विजिलेंस रिपोर्ट के अनुसार जिस भूमि को करोड़ों रुपये खर्च कर खरीदा गया, उसके आसपास नगर निगम का कूड़ा डंपिंग क्षेत्र मौजूद है। ऐसे में भूमि का मूल्यांकन सवालों के घेरे में आ गया। जांच में यह भी सामने आया कि कृषि भूमि को नियमों के तहत परिवर्तित कर खरीद प्रक्रिया को अंजाम दिया गया, जिससे पूरे सौदे पर गंभीर संदेह पैदा हुआ।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री धामी ने पहले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रणवीर सिंह चौहान से प्रारंभिक जांच कराई थी। जांच में गड़बड़ियों की पुष्टि होने पर तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह, नगर आयुक्त वरुण चौधरी और एसडीएम अजयवीर सिंह समेत कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था। अब विजिलेंस की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद सरकार ने और कठोर कदम उठाए हैं।
कार्रवाई के तहत पीसीएस अधिकारी अजयवीर सिंह की तीन वेतन वृद्धियां रोकने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं विजिलेंस को इस पूरे मामले में एफआईआर दर्ज करने की अनुमति भी मिल गई है। इसके बाद जांच एजेंसी अब आपराधिक मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।
मुकदमे की जद में केवल अधिकारी ही नहीं, बल्कि भूमि विक्रेता भी आए हैं। विजिलेंस आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी के साथ तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल, कर अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट, सहायक अभियंता आनंद सिंह मिश्रा, लिपिक वेदपाल और मानचित्रकार दिनेश कांडपाल के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करेगी। इसके अलावा भूमि विक्रेता सुमन देवी, जितेंद्र कुमार, अभिषेक यादव और सुजीत कुमार सिंह को भी आरोपी बनाया जाएगा।
अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण चरण मनी ट्रेल की जांच का होगा। विजिलेंस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि भूमि खरीद में खर्च हुई राशि का लाभ किन-किन लोगों तक पहुंचा और क्या इस पूरे प्रकरण में अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों की भी भूमिका रही है। जांच एजेंसी के लिए यही सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि विजिलेंस की प्राथमिक जांच में मामला साबित होने के बाद दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की संस्तुति की गई है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
हरिद्वार भूमि घोटाले में आईएएस अधिकारी की बर्खास्तगी की संस्तुति और पूर्व जिलाधिकारी पर मेजर पनिशमेंट की कार्रवाई ने पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचा दी है। अब सभी की नजर विजिलेंस की आगामी जांच और मनी ट्रेल से सामने आने वाले नए खुलासों पर टिकी हुई है।
