

सुरों के संग मनाया योग दिवस: मित्र म्यूज़िक स्कूल में संगीत को बताया सच्चा योग



रुद्रपुर। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रुद्रपुर स्थित मित्र म्यूज़िक स्कूल में एक भव्य एवं गरिमामयी सांगीतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर योग के पारंपरिक स्वरूप से हटकर संगीत और सुरों के माध्यम से योग के वास्तविक अर्थ को प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में संगीत, संस्कृति और आध्यात्मिक चिंतन का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्रीमती जागृति, विनीत पाठक, राज फूल राज, सार्वजनिक कल्याण समिति के संस्थापक मनमोहन यादव एडवोकेट, वरिष्ठ अधिवक्ता कौशल गंगवार एवं नरेश एडवोकेट द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक गरिमा का संचार हुआ।
मित्र म्यूज़िक स्कूल के संस्थापक एवं प्रधानाचार्य अमितांशु ने योग की वैज्ञानिक एवं दार्शनिक व्याख्या करते हुए कहा कि योग का वास्तविक अर्थ केवल शारीरिक व्यायाम या श्वास-प्रश्वास की क्रियाएं नहीं हैं, बल्कि योग का मूल अर्थ जोड़ना है। उन्होंने कहा कि संगीत में सुरों का मेल, ताल की लयबद्धता और भावों की अभिव्यक्ति भी योग का ही स्वरूप है। आत्मा का परमात्मा से, जीव का प्रकृति से और मानव का अपने भीतर की चेतना से जुड़ना ही सच्चा योग है।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ध्रुव, मुस्कान, इशिका, राम सागर, प्रियांश राज और सुरेंद्र ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। विशेष आकर्षण सुरेंद्र की पहली मंचीय प्रस्तुति रही। पहली बार मंच पर उतरने के बावजूद उनके आत्मविश्वासपूर्ण और मधुर गायन ने उपस्थित अतिथियों एवं श्रोताओं को प्रभावित किया। उनकी प्रस्तुति के बाद सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
सार्वजनिक कल्याण समिति के संस्थापक मनमोहन यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता कौशल गंगवार, राज फूल राज और नरेश ने अपने ओजस्वी संबोधनों के माध्यम से योग, संगीत और सामाजिक मूल्यों के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं अतिथि विनीत पाठक ने संगीत और जीवन के गहरे संबंधों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संगीत मनुष्य के व्यक्तित्व को निखारने और मानसिक संतुलन बनाए रखने का सशक्त माध्यम है।
कार्यक्रम के समापन सत्र में मित्र म्यूज़िक स्कूल के संरक्षक डॉ. विश्वमित्र शास्त्री ने विद्यार्थियों को आशीर्वाद देते हुए जीवन में कला, अनुशासन और सकारात्मक सोच के महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला साधन है।
कार्यक्रम को सफल बनाने वाले सभी बाल कलाकारों और प्रतिभागियों को प्रोत्साहन स्वरूप संस्थान की ओर से उपहार में पेन भेंट किए गए। सम्मान प्राप्त कर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
समारोह में नगर के प्रबुद्ध नागरिकों, संगीत प्रेमियों, अभिभावकों और विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। राष्ट्रगान तथा सभी के उत्तम स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाओं के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

