शहादत के बाद खुला फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम की ‘सीक्रेट शादी’ का राज, 21 लाख का चेक मिला तो परिवार रह गया हैरान, पिता बोले— “हक था, लेकिन फर्ज भी निभाना चाहिए था”

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शहादत के बाद खुला फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम की ‘सीक्रेट शादी’ का राज, 21 लाख का चेक मिला तो परिवार रह गया हैरान, पिता बोले— “हक था, लेकिन फर्ज भी निभाना चाहिए था”


पटना/जोरहाट। असम के जोरहाट में भारतीय वायुसेना के विमान हादसे में शहीद हुए फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार की शहादत के बाद एक ऐसा खुलासा हुआ जिसने परिवार, रिश्तेदारों और आम लोगों को हैरान कर दिया। जिस युवती को परिवार अब तक शुभम की मंगेतर मानता था, वह कानूनी रूप से उनकी पत्नी निकली। यह सच तब सामने आया जब बिहार सरकार की ओर से दी गई 21 लाख रुपये की सहायता राशि का चेक श्रेया राय को सौंपा गया।

जोरहाट में हुए दर्दनाक विमान हादसे में भारतीय वायुसेना के पांच जवान शहीद हो गए थे। इनमें बिहार के रहने वाले फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार भी शामिल थे। देश की सेवा करते हुए शहीद हुए शुभम के निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और लोगों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी।

शहीद अधिकारी के सम्मान में बिहार सरकार ने आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया। इसी दौरान जब 21 लाख रुपये की सहायता राशि का चेक श्रेया राय को दिया गया तो परिवार के सामने एक ऐसा सच आया जिसकी उन्हें पहले कोई जानकारी नहीं थी। दरअसल, शुभम और श्रेया की अगले साल सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार शादी होने वाली थी, लेकिन दोनों ने पहले ही कोर्ट मैरिज कर ली थी। परिवार को इस विवाह की जानकारी नहीं थी।

कोर्ट मैरिज के दस्तावेज सामने आने के बाद कानूनी रूप से श्रेया राय को फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार की पत्नी माना गया। इसी आधार पर बिहार सरकार ने सहायता राशि का चेक उन्हें सौंपा। हालांकि इस घटनाक्रम के बाद परिवार के भीतर भावनात्मक सवाल भी खड़े हो गए।

शहीद के पिता अमरेंद्र शर्मा ने इस मामले पर अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि उनके बेटे ने श्रेया से विवाह किया था तो वह उनकी बहू हैं और सहायता राशि पर उनका पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस अधिकार पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जिस तरह से घटनाक्रम हुआ, उससे परिवार को दुख पहुंचा है।

अमरेंद्र शर्मा ने कहा कि पत्नी होने के नाते कुछ सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारियां भी होती हैं। उनका कहना है कि श्राद्धकर्म जैसे महत्वपूर्ण पारिवारिक संस्कार से पहले श्रेया का चेक लेकर अपने घर लौट जाना उन्हें अच्छा नहीं लगा। उन्होंने भावुक स्वर में कहा, “अगर मेरे बेटे ने सच में श्रेया से शादी की थी तो वह मेरी बहू है और चेक पाने की पूरी हकदार है, लेकिन पत्नी का फर्ज निभाना भी जरूरी था। पति के श्राद्धकर्म से पहले ही उसका चले जाना हमें दुख दे गया।”

इस पूरे मामले ने कानून और भावनाओं के बीच खड़े उस अंतर को भी सामने ला दिया है, जहां एक तरफ कोर्ट मैरिज के आधार पर श्रेया को पत्नी का दर्जा और सभी कानूनी अधिकार प्राप्त हैं, वहीं दूसरी तरफ परिवार को यह पीड़ा है कि उन्हें अपने बेटे के जीवन के इतने बड़े फैसले की जानकारी तक नहीं थी।

शुभम कुमार की शहादत पर पूरा देश गर्व कर रहा है, लेकिन उनकी मौत के बाद सामने आई यह कहानी अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर बहस छिड़ी हुई है। कुछ लोग श्रेया के कानूनी अधिकार का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई लोग मानते हैं कि ऐसे कठिन समय में परिवार के साथ खड़ा रहना भी रिश्तों की एक बड़ी जिम्मेदारी होती है।

फिलहाल, देश अपने वीर सपूत फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार की शहादत को नमन कर रहा है, वहीं उनके जाने के बाद सामने आया यह पारिवारिक घटनाक्रम रिश्तों, अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर कई सवाल छोड़ गया है।