



*उधम सिंह नगर: शिक्षा माफियाओं का गढ़, अवैध स्कूलों और फर्जी शिक्षकों का बोलबाला*


उधम सिंह नगर जिले के मुख्यालय रुद्रपुर के ट्रांसिट कैम्प में शिक्षा व्यवस्था के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया है। यहां तंग गलियों में 10 बाय 10 के कमरों में नाबालिग बच्चों को पढ़ाने के नाम पर अवैध स्कूल चलाए जा रहे हैं। इन स्कूलों में मानकों को ताक पर रखकर बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है।
*भाजपा और कांग्रेसी नेताओं के संरक्षण में चल रहे हैं अवैध स्कूल*
आरोप है कि इन अवैध स्कूलों को भाजपा और कांग्रेसी नेताओं का संरक्षण प्राप्त है। खुद इन दलों के नेता भी स्कूल संचालित कर रहे हैं और गरीब जनता को ठगने का काम कर रहे हैं। इससे जिले भर में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
*फर्जी दस्तावेजों से शिक्षक ले रहे हैं नौकरी*
जिले में शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। अब तक के आंकड़ों के अनुसार, 50 से अधिक शिक्षक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करते हुए पाए गए हैं। इनमें से 20 शिक्षकों को निलंबित किया जा चुका है और 10 पर एफआईआर दर्ज की गई है।
*शिक्षा विभाग की भूमिका संदिग्ध*
इस पूरे प्रकरण में शिक्षा विभाग की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। लंबे समय से शिक्षा विभाग में तैनात 15 कर्मचारी ऐसे हैं जो कुंडली मारकर बैठे हुए हैं और अनियमित रूप से एक ही जगह बने हुए हैं। स्थानांतरण होने के बाद भी सेटिंग-गेटिंग के तहत जिला मुख्यालय शिक्षा विभाग रुद्रपुर में कुंडली मारे हुए हैं।
*सरकारी स्कूलों की स्थिति*
सरकारी स्कूलों की दुर्दशा के कारण कई स्कूल बंद हो गए हैं। जिले में चल रहे मर्जर अभियान के तहत 20 से अधिक स्कूलों को बंद किया जा चुका है। सरकारी व्यवस्था की स्थिति भी खराब है, जिसमें शिक्षकों की कमी और संसाधनों की कमी के कारण बच्चों को उचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है।
*क्या होगा आगे?*
अब देखना यह है कि सरकार इन अवैध स्कूलों पर कार्रवाई करेगी और शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को रोकने के लिए क्या कदम उठाएगी। क्या सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी या यह घोटाला ऐसे ही चलता रहेगा?

