सीरियल किलर की तरह गढ़ी अपराधियों ने कहानी, लेकिन अंकित पकड़े गए हैवान—72 घंटे में खुला ब्लाइंड मर्डर का खौफनाक राज

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सीरियल किलर की तरह गढ़ी अपराधियों ने कहानी, लेकिन अंकित पकड़े गए हैवान—72 घंटे में खुला ब्लाइंड मर्डर का खौफनाक राज


काशीपुर। अपराध की दुनिया में कई बार अपराधी वारदात से ज्यादा खौफनाक अपनी कहानी गढ़ते हैं। पुलिस को गुमराह करने के लिए सुराग मिटाते हैं, मोबाइल की लोकेशन बदलते हैं और जांच की दिशा दूसरी ओर मोड़ने की कोशिश करते हैं। काशीपुर में 19 वर्षीय युवती की हत्या के मामले में भी कुछ ऐसा ही करने की कोशिश की गई, लेकिन तकनीक, पुलिस की तफ्तीश और साक्ष्यों के आगे आरोपियों की पूरी कहानी महज 72 घंटे में बिखर गई। जिस वारदात को कथित तौर पर इस तरह अंजाम दिया गया कि पुलिस किसी दूसरे व्यक्ति तक पहुंचती रहे, उसी वारदात ने अंततः डंपर के भीतर छिपे कथित हैवानों का चेहरा सामने ला दिया।

सीरियल किलर की तरह गढ़ी अपराधियों ने कहानी, लेकिन अंकित पकड़े गए हैवान—यह मामला सिर्फ एक युवती की हत्या का नहीं, बल्कि उस बढ़ती हैवानियत की भयावह तस्वीर भी सामने लाता है, जिसमें इंसानियत और कानून का डर अपराधियों के सामने कमजोर पड़ता दिखाई देता है। हालांकि पुलिस की कार्रवाई ने साफ कर दिया कि अपराध के बाद चाहे कितनी भी चालाकी से कहानी क्यों न गढ़ी जाए, हर छोड़ा हुआ सुराग आखिरकार अपराधी तक पहुंचने का रास्ता बन सकता है।

20 अगस्त की सुबह धनौरी पट्टी, रामनगर रोड पर सड़क किनारे 19 वर्षीय युवती का शव मिलने की सूचना ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया। सिर पर गंभीर चोटों के निशान थे और शुरुआती जांच में ही मामला हत्या का प्रतीत हुआ। घटनास्थल पर मौजूद परिस्थितियां पुलिस के सामने एक ऐसे ब्लाइंड मर्डर की चुनौती लेकर आईं, जिसमें तत्काल कोई स्पष्ट आरोपी सामने नहीं था। लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी अजय गणपति ने स्वयं संज्ञान लिया और काशीपुर पुलिस को जल्द से जल्द हत्यारों तक पहुंचने के निर्देश दिए।

इसके बाद शुरू हुई वह जांच, जिसमें पुलिस ने एक-एक कड़ी को जोड़ना शुरू किया। मृतका के घर से लेकर घटनास्थल तक के संभावित रास्तों को खंगाला गया। करीब 200 से 250 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी गई। घंटों की फुटेज में पुलिस की नजर एक ऐसे डंपर पर जाकर टिक गई, जिसकी गतिविधियां घटना के समय संदिग्ध दिखाई दीं। चैती मेला रोड से चीमा चौराहा, रामनगर रोड और केलामोड़ होते हुए ओंकार स्टोन क्रेशर की ओर जाने वाले इस डंपर ने जांच की दिशा बदल दी।

इसके बाद मोबाइल फोन पुलिस के लिए सबसे अहम सुराग बन गया। मृतका के मोबाइल नंबर की सीडीआर और लोकेशन का विश्लेषण किया गया। पुलिस के मुताबिक घटना से कुछ समय पहले उसकी लोकेशन चैती मैदान के आसपास थी। सुबह करीब 4:35 बजे उसने चैती रोड से चीमा चौराहा जाने के लिए रैपिडो बुक की, लेकिन करीब तीन मिनट बाद ही बुकिंग कैंसिल हो गई। इसके बाद मोबाइल गुलजारपुर क्षेत्र में सड़क पर मिला। सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि मोबाइल फ्लाइट मोड में था।

पुलिस ने जब इन सभी तथ्यों को सीसीटीवी फुटेज से मिलाया तो संदिग्ध डंपर तक पहुंच बनी। डंपर संख्या UK15CA-1437 के संबंध में पूछताछ की गई तो पता चला कि घटना के समय वाहन राजू पुत्र ललित चला रहा था और उसके साथ सुमित पुत्र राजू मौजूद था। दोनों से पूछताछ शुरू हुई और पुलिस के अनुसार पूछताछ में वारदात की कथित खौफनाक कहानी सामने आई।

पुलिस के मुताबिक राजू और सुमित 20 अगस्त की सुबह खनिज सामग्री लेने क्रेशर की ओर जा रहे थे। चैती मैदान के पास एक महिला ने डंपर रुकवाया और दोनों ने उसे वाहन में बैठा लिया। कुछ दूर जाने के बाद राजू ने सुमित को डंपर चलाने के लिए कहा और स्वयं महिला के पास बैठ गया। पुलिस का दावा है कि एकांत स्थान पर राजू ने युवती के साथ जबरदस्ती करने का प्रयास किया। युवती ने इसका विरोध किया और पुलिस में शिकायत करने की बात कही। इसी दौरान कथित तौर पर उसने राजू के हाथ में दांत काट लिया।

इसके बाद जो हुआ, वह इस पूरे मामले का सबसे भयावह हिस्सा है। पुलिस के अनुसार राजू ने डंपर में रखे लोहे के हुक से युवती के सिर पर कई वार कर दिए। गंभीर चोटों के कारण युवती की डंपर के अंदर ही मौत हो गई। इसके बाद दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर शव को सड़क किनारे फेंक दिया और खनिज सामग्री लेने क्रेशर की ओर चले गए।

लेकिन अपराध यहीं खत्म नहीं हुआ। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने जांच को गुमराह करने के लिए मृतका के मोबाइल को भी एक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश की। मोबाइल डंपर में छूट गया था। कथित तौर पर पुलिस को किसी दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से उसे ओंकार स्टोन क्रेशर से पहले सड़क पर रख दिया गया। मोबाइल को फ्लाइट मोड में डाल दिया गया, ताकि उसकी सामान्य गतिविधियों से जांच को भटकाया जा सके।

अपराधियों को शायद लगा होगा कि कहानी यहीं खत्म हो जाएगी, लेकिन पुलिस की तकनीकी जांच ने पूरी पटकथा पलट दी। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, सीडीआर और अन्य साक्ष्यों को एक साथ जोड़ने पर संदिग्ध डंपर तक पहुंच बनी। फिर डंपर और उसमें मौजूद लोगों से जुड़े साक्ष्यों ने पुलिस को आरोपियों तक पहुंचा दिया।

23 अगस्त को पुलिस ने राजू और सुमित को गिरफ्तार कर लिया। उनकी निशानदेही पर उसी डंपर से वारदात में इस्तेमाल किया गया लोहे का हुक बरामद हुआ। मृतका का बैग भी डंपर से मिला, जिसमें आधार कार्ड, बैंक पासबुक और आयुष्मान कार्ड थे। इसके अलावा घटना के समय आरोपियों द्वारा पहने गए कपड़े भी बरामद किए गए। पुलिस ने मृतका का मोबाइल फोन भी बरामद किया।

इस पूरे घटनाक्रम ने समाज के सामने एक बेहद गंभीर सवाल खड़ा किया है—आखिर इंसान के भीतर की संवेदना इतनी कमजोर कैसे होती जा रही है कि एक युवती के विरोध को कुचलने के लिए उसकी जान तक लेने से भी अपराधी पीछे नहीं हटते। अपराध केवल कानून तोड़ने की घटना नहीं होता, वह समाज के भीतर मौजूद उस मानसिकता का आईना भी होता है, जहां दूसरे इंसान की जिंदगी और सम्मान की कीमत कुछ लोगों की नजर में खत्म होती जा रही है।

काशीपुर की यह वारदात यह भी बताती है कि अपराधी चाहे कितनी भी चालाकी से कहानी क्यों न रचें, तकनीक और मजबूत पुलिस तफ्तीश के सामने उनके झूठ की उम्र लंबी नहीं होती। सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, मोबाइल की लोकेशन और डिजिटल साक्ष्यों ने उस कहानी को खोल दिया, जिसे आरोपियों ने कथित तौर पर पुलिस को भ्रमित करने के लिए तैयार किया था।

एसएसपी अजय गणपति के निर्देशन में 72 घंटे के भीतर हुए इस खुलासे ने यह संदेश भी दिया है कि अपराध के बाद सुराग मिटाने की कोशिश अपराधी को कानून से नहीं बचा सकती। पुलिस के सामने अब इस मामले में आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को मजबूत करते हुए न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की चुनौती है।

एक 19 वर्षीय युवती की जिंदगी खत्म हो गई, एक परिवार की दुनिया उजड़ गई और समाज के सामने फिर वही सवाल खड़ा है—क्या अपराधियों के भीतर से कानून का डर खत्म होता जा रहा है? इस मामले में पुलिस ने आरोपियों को पकड़कर जवाब तो दे दिया है, लेकिन असली जवाब तब होगा जब ऐसी हैवानियत को जन्म देने वाली मानसिकता पर भी समाज गंभीरता से विचार करेगा। कानून अपना काम करेगा, मगर समाज को भी यह तय करना होगा कि इंसानियत को अपराधियों की सोच के नीचे कुचलने नहीं दिया जाएगा।