मोदी की देहरादून मेगा रैली में दो तस्वीरें, कई सवाल! कहीं पांडे अलग-थलग तो कहीं गौतम नदारद—क्या बीजेपी में सब ठीक?

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  1. मोदी की देहरादून मेगा रैली में दो तस्वीरें, कई सवाल! कहीं पांडे अलग-थलग तो कहीं गौतम नदारद—क्या बीजेपी में सब ठीक?

देहरादून में 14 अप्रैल को आयोजित प्रधानमंत्री Narendra Modi का भव्य कार्यक्रम जहां विकास, शक्ति प्रदर्शन और संगठनात्मक एकजुटता का संदेश देने वाला था, वहीं इसी मंच से दो ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने उत्तराखंड की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। Dehradun में हुए इस ऐतिहासिक आयोजन में प्रधानमंत्री ने Delhi-Dehradun Expressway का उद्घाटन किया, 12 किलोमीटर लंबा रोड शो किया और विशाल जनसभा को संबोधित किया। कार्यक्रम में भारी भीड़ उमड़ी और मंच पर भाजपा के तमाम बड़े नेता एक साथ नजर आए, लेकिन इसी भीड़ और भव्यता के बीच दो घटनाओं ने राजनीतिक संकेतों को लेकर सवाल खड़े कर दिए।


पहली तस्वीर गदरपुर से भाजपा विधायक Arvind Pandey की रही, जो पूरे कार्यक्रम में अन्य विधायकों और नेताओं से अलग तीसरी पंक्ति में मीडिया गैलरी के पास अकेले बैठे नजर आए। जहां बाकी सभी विधायक एक साथ बैठकर एकजुटता का संदेश दे रहे थे, वहीं अरविंद पांडे का इस तरह अलग बैठना चर्चा का विषय बन गया। बीते कुछ समय से उनकी नाराजगी को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा पहले से ही गर्म थी और इस तस्वीर ने उन अटकलों को और बल दे दिया। बताया जाता है कि कुछ समय पहले उनके परिवार पर अतिक्रमण के आरोप लगे थे और प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किया गया था, जिसके बाद से वे कई सरकारी और पार्टी कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए दिख रहे हैं। हालांकि इस पूरे मामले पर खुद अरविंद पांडे ने सफाई देते हुए कहा कि पीछे बैठना उनका निजी निर्णय था और उन्होंने किसी अव्यवस्था से बचने के लिए स्वेच्छा से यह स्थान चुना, जबकि उन्हें प्रोटोकॉल के तहत आगे बैठने का अवसर भी दिया गया था।

दूसरी तस्वीर इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली रही, जब इतने बड़े कार्यक्रम से उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश प्रभारी Dushyant Gautam पूरी तरह गायब नजर आए। आमतौर पर ऐसे महत्वपूर्ण आयोजनों में संगठन के शीर्ष पदाधिकारी प्रमुख भूमिका में होते हैं, लेकिन दुष्यंत गौतम की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के साथ कैबिनेट मंत्री, सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री Tirath Singh Rawat और Vijay Bahuguna भी मंच पर मौजूद रहे, लेकिन प्रदेश प्रभारी का न होना कई सवाल छोड़ गया।

इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष ने भी मौका नहीं गंवाया। कांग्रेस की प्रवक्ता Pratima Singh ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा खुद अपने नेता को लेकर असहज है और उन्हें मंच से दूर रखकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष Ganesh Godiyal ने भी आरोप लगाया कि गंभीर आरोपों के चलते पार्टी नेतृत्व ने दूरी बना ली है।

भाजपा ने हालांकि इन तमाम अटकलों को खारिज करते हुए सफाई दी है। पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी Manveer Chauhan का कहना है कि यह एक सरकारी कार्यक्रम था, जिसमें संगठन के पदाधिकारियों को मंच पर स्थान नहीं दिया गया और सिर्फ दुष्यंत गौतम ही नहीं, बल्कि अन्य पदाधिकारी भी मौजूद नहीं थे। उन्होंने विपक्ष पर अनर्गल बयानबाजी का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस मामले को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसमें राज्य सरकार पहले ही सीबीआई जांच की सिफारिश कर चुकी है।

एक ही मंच से सामने आई ये दो अलग-अलग तस्वीरें अब उत्तराखंड की राजनीति में गहरे संकेत छोड़ रही हैं। एक ओर विधायक का अलग-थलग बैठना और दूसरी ओर प्रदेश प्रभारी का पूरी तरह गायब रहना यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या भाजपा के भीतर सब कुछ सामान्य है या फिर अंदरखाने कुछ और चल रहा है। फिलहाल इन सवालों के जवाब स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन इतना तय है कि देहरादून की इस मेगा रैली ने राजनीतिक हलचल को नई दिशा दे दी है।