जख्म पैर में लगा और जीत लिया दिल, लव स्टोरी’ से लेकर लॉ एंड ऑर्डर तक नई कमान का इम्तिहान — क्या अजय गणपति कुंभर चुनौतियों पर उतर पाएंगे खरे?

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“समाचार इंडिया 1”  महेंद्र पाल मौर्य, रुद्रपुर। उधम सिंह नगर में एक बार फिर प्रशासनिक हलचल ने सियासी और नौकरशाही गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा को पद से हटाकर पुलिस अधीक्षक अभिसूचना बनाया गया है। शासन के इस फैसले को प्रदेश की कानून-व्यवस्था और हालिया घटनाक्रमों की पृष्ठभूमि में अहम माना जा रहा है। आदेश जारी होते ही जिले की कमान 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय गणपति कुम्भार को सौंप दी गई, जो इससे पहले चंपावत जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात थे।


अजय गणपति कुम्भार का प्रशासनिक सफर जितना अनुशासित और प्रोफेशनल रहा है, उनकी निजी कहानी उतनी ही चर्चित रही है। मूल रूप से पश्चिम बंगाल कैडर के आईपीएस अधिकारी रहे कुम्भार ने बीते वर्ष कैडर परिवर्तन कर उत्तराखंड में सेवाएं शुरू कीं। इस बदलाव के पीछे उनकी निजी जिंदगी भी एक महत्वपूर्ण कारण बनी। उन्होंने 2019 बैच की उत्तराखंड कैडर की आईपीएस अधिकारी रेखा यादव से विवाह किया, जिसके बाद उन्होंने औपचारिक रूप से उत्तराखंड कैडर जॉइन किया।

दोनों की मुलाकात हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान हुई थी। प्रशिक्षण के समय रेखा यादव के पैर में फ्रैक्चर हो गया था और उन्हें अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। इसी दौरान अजय गणपति कुम्भार उनसे मिलने पहुंचे और बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। यह मुलाकात दोस्ती से होते हुए प्रेम में बदली और बाद में दोनों ने पहले कोर्ट मैरिज की, फिर पूरे रीति-रिवाज के साथ विवाह संपन्न किया। प्रशासनिक हलकों में यह प्रेम कहानी लंबे समय तक चर्चा का विषय रही।

रेखा यादव मूल रूप से राजस्थान के कोटपुतली (जयपुर) की निवासी हैं और उत्तराखंड में कई अहम जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं। हाल तक वह पिथौरागढ़ जिले में तैनात थीं और अब उन्हें चंपावत जिले की कमान सौंपी गई है। इस प्रकार एक ही परिवार के दो आईपीएस अधिकारियों के हाथों में दो महत्वपूर्ण जिलों की जिम्मेदारी होना भी खासा चर्चा का विषय बना हुआ है।

उधर, उधम सिंह नगर प्रदेश का सबसे संवेदनशील और राजनीतिक दृष्टि से अहम जिला माना जाता है। औद्योगिक गतिविधियों, सीमा क्षेत्र की संवेदनशीलता, तेजी से बदलते सामाजिक समीकरण और आपराधिक चुनौतियों के बीच यहां कानून-व्यवस्था बनाए रखना किसी भी कप्तान के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में अजय गणपति कुम्भार के सामने संगठित अपराध पर सख्ती, पुलिसिंग में पारदर्शिता, जनविश्वास की बहाली और राजनीतिक दबावों के बीच संतुलन बनाना बड़ी कसौटी साबित होगा।

अब सवाल यही है कि क्या नए कप्तान अपनी सख्त प्रशासनिक शैली से जिले में ठोस बदलाव ला पाएंगे? क्या अपराध नियंत्रण पर स्पष्ट असर दिखाई देगा? क्या पुलिस महकमे में जवाबदेही और अनुशासन की नई रेखा खिंचेगी? उधम सिंह नगर में कप्तानी बदलाव ने फिलहाल उम्मीद, उत्सुकता और सियासी बहस—तीनों को एक साथ जगा दिया है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि ‘लव स्टोरी’ से सुर्खियों में आए आईपीएस अधिकारी लॉ एंड ऑर्डर की असली परीक्षा में कितने खरे उतरते हैं।