शिक्षा का बाज़ार और सवालों के घेरे में कृष्ण इंटर कॉलेज—विकलांग छात्र से मारपीट, जातिसूचक शब्दों का आरोप, फीस वसूली पर भड़का बवाल छात्रसंघ अध्यक्ष रजत बिष्ट और उपाध्यक्ष चंदन भट्ट ने संभाला मोर्चा।

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शिक्षा का बाज़ार और सवालों के घेरे में कृष्ण इंटर कॉलेज—विकलांग छात्र से मारपीट, जातिसूचक शब्दों का आरोप, फीस वसूली पर भड़का बवाल


छात्रसंघ अध्यक्ष रजत बिष्ट और उपाध्यक्ष चंदन भट्ट ने संभाला मोर्चा

रुद्रपुर।

बदलते शैक्षिक परिवेश में शिक्षा के मायने लगातार बदलते जा रहे हैं। कभी समाज में सबसे बड़ा दान मानी जाने वाली शिक्षा आज मुनाफ़े के कारोबार में तब्दील होती दिखाई दे रही है। रुद्रपुर शहर में निजी शिक्षण संस्थानों से जुड़े विवाद समय-समय पर इसी सच्चाई की बानगी देते रहे हैं। हाल ही में हैप्पी चाइल्ड स्कूल, रमपुरा में शिक्षक द्वारा बच्चों के साथ मारपीट का मामला सामने आया था और अब एक और गंभीर व संवेदनशील प्रकरण आदर्श इंदिरा बंगाली कॉलोनी स्थित कृष्ण इंटर कॉलेज से सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था की संवेदनशीलता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

छात्रों का आरोप है कि इन दिनों हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड की प्रयोगात्मक परीक्षाएं चल रही हैं, जिनके नाम पर कॉलेज प्रबंधन द्वारा निर्धारित से कहीं अधिक शुल्क वसूला जा रहा था। जब छात्रों ने इस कथित मनमानी फीस वसूली का विरोध किया तो आरोप है कि कॉलेज के एक शिक्षक ने विरोध करने वाले छात्रों में से एक विकलांग छात्र के साथ बेरहमी से मारपीट की। छात्रों का यह भी कहना है कि इस दौरान शिक्षक द्वारा जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे छात्रों में भारी आक्रोश फैल गया।

घटना की जानकारी फैलते ही कॉलेज परिसर का माहौल तनावपूर्ण हो गया। आक्रोशित छात्रों ने कॉलेज के मुख्य गेट पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया और पुलिस प्रशासन को मौके पर बुलाया गया। हालात बिगड़ते देख कॉलेज प्रबंधन को पीछे हटना पड़ा और प्रयोगात्मक परीक्षाओं की फीस घटाकर 100 रुपये प्रति विषय करने पर सहमति जतानी पड़ी। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति न होने का आश्वासन भी दिया गया, हालांकि छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि केवल आश्वासन से भरोसा बहाल नहीं होता।

इस पूरे मामले में जब समाचार इंडिया 1 ने कॉलेज के प्रधानाचार्य से बातचीत की तो उन्होंने मारपीट की घटना से इनकार किया। प्रधानाचार्य का कहना था कि कुछ छात्र बाहरी छात्रसंघ पदाधिकारियों को बुलाकर कॉलेज परिसर में राजनीति कर रहे थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ छात्रों के प्रैक्टिकल नोट्स पूरे नहीं थे, जिन्हें पूरा करने के लिए कहा जा रहा था और इसी बात को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए रुद्रपुर डिग्री कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष रजत सिंह बिष्ट और उपाध्यक्ष चंदन भट्ट मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्रों से संवाद कर स्थिति को शांत कराया और कॉलेज प्रशासन व शिक्षकों से सीधे बातचीत कर छात्र हितों को मजबूती से सामने रखा। उनकी मध्यस्थता के बाद हालात पर काबू पाया जा सका, लेकिन मामला शहर भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

गौरतलब है कि कृष्ण इंटर कॉलेज का नाम इससे पहले भी कई बार विवादों में आ चुका है। आरोप लगते रहे हैं कि यहां शिक्षा की गुणवत्ता, अनुशासन और छात्रों के सर्वांगीण विकास की बजाय अव्यवस्था और मनमानी हावी रहती है। बार-बार सामने आते ऐसे प्रकरण यह संकेत देते हैं कि व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर खामियां हैं, जिन पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

इस पूरे मामले पर मुख्य शिक्षा अधिकारी कुंवर सिंह रावत ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि प्रकरण का संज्ञान लिया जा रहा है और कॉलेज प्रशासन व संबंधित शिक्षकों से पूरे मामले की विस्तृत जानकारी प्राप्त की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल उन्हें पूरे घटनाक्रम की संपूर्ण जानकारी नहीं है, लेकिन प्रारंभिक बातचीत में सामने आए तथ्यों के आधार पर जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

अब सबसे बड़ा सवाल शिक्षा विभाग की भूमिका पर खड़ा होता है। जब एक ही शहर में लगातार निजी शिक्षण संस्थानों से जुड़े ऐसे गंभीर मामले सामने आ रहे हैं, तो आखिर जिम्मेदार विभाग कब तक आंखें मूंदे रहेगा। यदि समय रहते सख्त और उदाहरणात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो शिक्षा के नाम पर व्यापार करने वाले ये संस्थान कितने बेलगाम हो जाएंगे, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है। यह मामला केवल एक कॉलेज या एक छात्र तक सीमित नहीं है, बल्कि उस पूरी व्यवस्था पर सवाल है जो शिक्षा को संस्कार और संवेदनशीलता नहीं, बल्कि मुनाफ़े का ज़रिया बनाती जा रही है।