भारत-नेपाल सीमा पर मैत्री सम्मेलन, अतिक्रमण हटाने और क्षतिग्रस्त पिलरों के पुनर्स्थापन पर बनी सहमति

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भारत-नेपाल सीमा पर मैत्री सम्मेलन, अतिक्रमण हटाने और क्षतिग्रस्त पिलरों के पुनर्स्थापन पर बनी सहमति


खटीमा/बनबसा, 16 जून। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में बेहतर समन्वय और सीमा संबंधी समस्याओं के समाधान को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण मैत्री सम्मेलन आयोजित किया गया। नेपाल में आयोजित इस बैठक में भारत और नेपाल के सीमावर्ती जिलों के प्रशासनिक एवं सुरक्षा अधिकारियों ने भाग लिया।

सम्मेलन में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित नो-मैन्स लैंड में अतिक्रमण, क्षतिग्रस्त सीमा पिलरों के पुनर्स्थापन और सीमा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों के अधिकारियों ने सीमा क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और आपसी सहयोग को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।

बैठक में सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी), सर्वे विभाग की टीमों तथा दोनों देशों के प्रशासनिक अधिकारियों ने संयुक्त रूप से सीमा क्षेत्र की समस्याओं पर विचार-विमर्श किया। इस दौरान क्षतिग्रस्त सीमा पिलरों की पहचान के लिए संयुक्त सर्वेक्षण कराने और नो-मैन्स लैंड पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए समन्वित कार्रवाई पर सहमति बनी।

नितिन सिंह भदौरिया ने कहा कि भारत और नेपाल के अधिकारियों के बीच सीमा संबंधी मुद्दों पर नियमित संवाद और समन्वय बेहद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों की टीमें जल्द ही संयुक्त कार्रवाई करते हुए क्षतिग्रस्त पिलरों के पुनर्स्थापन और अतिक्रमण हटाने का कार्य शुरू करेंगी।

नेपाल प्रशासन के अधिकारियों ने भी सीमा प्रबंधन के मुद्दों पर सहयोग का भरोसा जताते हुए कहा कि आपसी समन्वय से सीमावर्ती क्षेत्रों की समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव है।

बैठक में सीमा क्षेत्र की कानून-व्यवस्था, अवैध गतिविधियों की रोकथाम तथा सीमावर्ती नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने सीमा क्षेत्र में सौहार्दपूर्ण संबंधों और सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।