

विश्व पटल पर हिंदी का परचम लहराने का संकल्प, बुलंदी साहित्यिक सेवा समिति से जुड़ने का सुनहरा अवसर
बाजपुर। हिंदी भाषा, साहित्य और भारतीय संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन एवं वैश्विक प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्यरत बुलंदी साहित्यिक सेवा समिति (पंजी.) ने साहित्यकारों, कवियों, लेखकों, शोधार्थियों एवं हिंदी प्रेमियों से संस्था की वार्षिक सदस्यता ग्रहण कर इस साहित्यिक अभियान से जुड़ने का आह्वान किया है। संस्था का ध्येय वाक्य “साहित्य हमारा धर्म है, हिंदी हमारी मातृभाषा” है और इसी उद्देश्य के साथ यह मंच राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साहित्यिक गतिविधियों का संचालन कर रहा है।
संस्था की स्थापना 5 अगस्त 2020 को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि विवेक बादल बाजपुरी ने की थी। अल्प समय में ही समिति ने देश और विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है तथा साहित्य जगत में एक सशक्त और सम्मानित मंच के रूप में स्थापित होने का दावा किया है।
तीन विश्व कीर्तिमानों का गौरव
बुलंदी साहित्यिक सेवा समिति ने अब तक तीन विश्व कीर्तिमान स्थापित किए हैं। वर्ष 2021 में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए 207 घंटे का निरंतर कवि सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसे इंडिया वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। इसके बाद वर्ष 2022 में 45 देशों के साहित्यकारों की सहभागिता के साथ 400 घंटे का अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल कवि सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसे भी इंडिया वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला। वहीं वर्ष 2024 में 65 देशों की सहभागिता के साथ 270 घंटे का अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक आयोजन आयोजित कर एक और विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने का दावा किया गया।
देश-विदेश में साहित्यिक गतिविधियों का विस्तार
समिति द्वारा अब तक अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन, साहित्यिक गोष्ठियां, संगोष्ठियां, पुस्तक विमोचन, शोध परिचर्चाएं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इसके अलावा हिंदी पखवाड़ा के अवसर पर विद्यालयों और महाविद्यालयों में निबंध, चित्रांकन, भाषण, स्वरचित काव्य-पाठ सहित विभिन्न साहित्यिक एवं शैक्षिक प्रतियोगिताओं का आयोजन कर युवा प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया जाता है।
सदस्य बनने पर मिलेंगे कई अवसर
समिति से जुड़ने वाले सदस्यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने, देश-विदेश के साहित्यकारों, कवियों, लेखकों, संपादकों और शोधार्थियों से जुड़ने, साहित्यिक नेटवर्क का विस्तार करने तथा सम्मेलन, संगोष्ठी, पुस्तक विमोचन और सांस्कृतिक आयोजनों में भागीदारी का अवसर मिलता है। इसके साथ ही उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए सम्मान, अलंकरण और विशेष पहचान भी प्रदान की जाती है।
संस्था की पत्रिकाओं, साझा संकलनों एवं अन्य प्रकाशनों में रचनाएं प्रकाशित कराने का अवसर भी सदस्यों को मिलता है। नवोदित और वरिष्ठ साहित्यकारों के लिए यह मंच साहित्यिक मार्गदर्शन, सहयोग और रचनात्मक विकास का माध्यम भी बन रहा है।
वार्षिक सदस्यता के विशेष लाभ
संस्था की वार्षिक सदस्यता लेने वाले सदस्यों को सभी साहित्यिक कार्यक्रमों की नियमित जानकारी, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में प्राथमिकता, साझा संकलनों और विशेषांकों में प्राथमिकता के आधार पर प्रकाशन, सदस्यता पहचान-पत्र (आई-कार्ड) तथा संस्था की विभिन्न साहित्यिक समितियों एवं गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर प्राप्त होता है।
‘विधा प्रकाशन’ से लेखकों को मिल रहा सहयोग
समिति का स्वयं का प्रकाशन प्रतिष्ठान ‘विधा प्रकाशन’ भी साहित्यकारों के लिए विशेष सुविधा उपलब्ध करा रहा है। इसके माध्यम से पुस्तक प्रकाशन, संपादन, प्रूफ संशोधन, आवरण निर्माण, ISBN, मुद्रण एवं प्रचार-प्रसार जैसी सेवाएं गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती दरों पर उपलब्ध कराई जाती हैं। संस्था से जुड़े साहित्यकारों को इन सेवाओं में विशेष छूट और प्राथमिकता भी दी जाती है।
हिंदी के वैश्विक अभियान से जुड़ने की अपील
समिति ने साहित्यकारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और हिंदी प्रेमियों से अपील की है कि वे संस्था की वार्षिक सदस्यता ग्रहण कर हिंदी भाषा को वैश्विक प्रतिष्ठा दिलाने, साहित्यिक प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने तथा भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन के इस अभियान का हिस्सा बनें। संस्था ने इच्छुक लोगों से सदस्यता ग्रहण करने एवं आर्थिक सहयोग के लिए जारी क्यूआर कोड के माध्यम से जुड़ने का भी आग्रह किया है।


