दो लड़कियां एक दूसरे से शादी के लिए अड़ी। पुलिस कर रही समझने का प्रयास। “

  1. दो लड़कियां एक दूसरे से शादी के लिए अड़ी। पुलिस कर रही समझने का प्रयास। “दो लड़कियां एक दूसरे से शादी करने के लिए अड़ी। पुलिस कर रही समझने का प्रयास। “समाचार इंडिया 1” खबर – महेंद्रपाल मौर्य रुद्रपुर – बदलते सामाजिक रिश्तों के प्रभाव से अब रुद्रपुर शहर भी अछूता नहीं रह गया है। रुद्रपुर के एक थाना क्षेत्र में अजीबो गरीब मामला सामने आया है। जहां दो बालिग युवतियां आपस में शादी करने पर अड़ गई है। एक लड़की के शादी के लिए लड़के देखने वाले आ रहे हैं उक्त लड़की के पिता ने बताया कि दूसरी लड़की  ,लगातार  शादी न करने का दवाब बनाती है और अब उसके साथ शादी करके रहने के लिए अड़ी हुई है । जिसको लेकर अब परिवार थाने में पहुंचा तो थाने के पुलिस अधिकारियों ने दोनों लड़कियों को समझने का प्रयास किया और उन्हें बताया कि यह प्रकृति के विपरीत हैं और कानून भी शादी करने की इजाजत नहीं देता है लेकिन अभी भी दूसरी से लड़की शादी करने की जिद पर अड़ी हुई है । वहीं भारत में सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटा दिया था, इसलिए आपसी सहमति से वयस्कों के बीच बनाए गए समलैंगिक संबंध अब अपराध नहीं हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता नहीं दी है, पर सम्मानजनक तरीके से लिव-इन रिलेशनशिप में रहने और भेदभाव का सामना न करने का अधिकार दिया है।

मुख्य बिंदु:

समलैंगिकता अब अपराध नहीं है: नवतेज सिंह जोहर मामले में 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 को रद्द कर दिया था, जिससे आपसी सहमति से वयस्कों के बीच समलैंगिक संबंध बनाना अब अपराध नहीं है।

विवाह को मान्यता नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में समलैंगिक विवाहों को कानूनी मान्यता देने की याचिकाओं को खारिज कर दिया। इसका मतलब है कि मौजूदा भारतीय कानूनों के तहत समान-लिंग वाले जोड़ों के विवाह को मान्यता नहीं मिलती है।

लिव-इन रिलेशनशिप का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि समलैंगिक जोड़ों को सम्मान और गरिमा के साथ रहने का अधिकार है। लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले समलैंगिक जोड़ों को कुछ सीमित कानूनी मान्यता प्राप्त है।

भेदभाव के खिलाफ अधिकार: संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मानपूर्वक जीने के अधिकार का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि समलैंगिक व्यक्तियों को भी समाज में भेदभाव के बिना मनुष्य के रूप में व्यवहार किए जाने का अधिकार है।

संक्षेप में, भारत में समलैंगिक लोगों को अब आपसी सहमति से संबंध बनाने और लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का अधिकार है, लेकिन कानूनी विवाह का अधिकार अभी भी नहीं है।