

महाविद्यालय में ‘क से कविता’ का आयोजन, गूंज उठीं हिंदी-उर्दू की स्वर लहरियां।


चमोली। स्व. संग्राम सेनानी आलम सिंह फरस्वाण राजकीय महाविद्यालय, तलवाड़ी-थराली में ‘अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ (21 फरवरी) के उपलक्ष्य में हिंदी विभाग द्वारा ‘क से कविता’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने देश के प्रतिष्ठित कवि-शायरों की रचनाओं का सस्वर पाठ कर साहित्यिक वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. खेमकरण सोमन ने प्रभारी प्राचार्य डॉ. प्रतिभा आर्य, शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं के स्वागत के साथ किया। उन्होंने ‘शायरी का खुदा’ कहे जाने वाले मीर तकी मीर की प्रसिद्ध ग़ज़ल ‘आगे-आगे देखिए होता है क्या’ और चर्चित शायर वसीम बरेलवी की ग़ज़ल ‘साँस का मतलब जान नहीं’ सुनाकर कार्यक्रम को साहित्यिक ऊंचाई प्रदान की।
कार्यक्रम में बीए द्वितीय सेमेस्टर की अनमोल जोशी ने कुँअर बेचैन की कविता ‘ज़रा याद रखना, यहाँ की कहानी’, बीए चतुर्थ सेमेस्टर की तनुजा जोशी ने साहित्य अकादमी से सम्मानित कवयित्री गगन गिल की रचना ‘लड़की अभी उदास नहीं है’ का पाठ किया। एमए चतुर्थ सेमेस्टर के अशोक कुमार ने जनकवि अदम गोंडवी की कविता ‘मैं चमारों की गली तक ले चलूंगा आपको’ प्रस्तुत की।
इतिहास विभाग के अनुज कुमार ने प्रसिद्ध शायर साहिर लुधियानवी की ग़ज़ल ‘इश्क़ की गर्मी-ए-जज़्बात किसे पेश करूँ’, बीए षष्ठ सेमेस्टर के प्रदीप कुमार ने गीतकार गोपाल दास नीरज का गीत ‘विश्व चाहे या न चाहे’ सुनाया। बीए द्वितीय सेमेस्टर की संध्या रावत ने पाकिस्तानी शायर हबीब जालिब की ग़ज़ल ‘दिल की बात लबों पर लाकर अब तक हम दुख सहते हैं’ का प्रभावशाली पाठ किया।
संस्कृत विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर रजनी नेगी ने रामदरश मिश्र की ग़ज़ल ‘बनाया है मैंने ये घर धीरे-धीरे’ प्रस्तुत की। हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार ने विष्णु नगर की कविता ‘गधा’ और विभाग प्रभारी डॉ. पुष्पा रानी ने ओम प्रकाश वाल्मीकि की कविता ‘तब तुम क्या करोगे’ तथा सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की रचना ‘अभी न होगा मेरा अंत’ का ओजस्वी पाठ किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्रभारी प्राचार्य डॉ. प्रतिभा आर्य ने छात्र-छात्राओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि देश के सुप्रसिद्ध कवि-शायरों की रचनाओं का सस्वर पाठ सुनना अत्यंत सुखद अनुभव है। उन्होंने कहा कि साहित्य, कला और संस्कृति का विकास ऐसे आयोजनों से ही संभव है तथा पढ़ाई के साथ सहगामी गतिविधियों का भी विशेष महत्व है।
अंत में हिंदी विभाग प्रभारी डॉ. पुष्पा रानी ने सभी शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विभागीय स्तर पर इस प्रकार के साहित्यिक आयोजन भविष्य में भी निरंतर आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. खेमकरण सोमन ने किया।
