सुखवंत सिंह आत्महत्या कांड: भाकपा(माले) का सरकार- शासन -प्रशासन, भूमाफियाओ के गठजोड़ तीखा वार, एसएसपी हटाने की दो टूक मांग।

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सुखवंत सिंह आत्महत्या कांड: भाकपा(माले) का सरकार-पुलिस गठजोड़ पर तीखा वार, एसएसपी हटाने की दो टूक मांग


काशीपुर/बाजपुर | 19 जनवरी

उधम सिंह नगर जनपद के चर्चित किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या कांड ने एक बार फिर शासन-प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले को लेकर भाकपा(माले) ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर सीधा और तीखा हमला बोला है। पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने ग्राम पैगा पहुंचकर मृतक किसान स्वर्गीय सुखवंत सिंह के परिजनों से मुलाकात की, उन्हें सांत्वना दी और भरोसा दिलाया कि न्याय की इस लड़ाई में भाकपा(माले) परिवार के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।

भाकपा(माले) ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि सुखवंत सिंह की आत्महत्या कोई सामान्य या व्यक्तिगत घटना नहीं है, बल्कि यह जिले में वर्षों से सक्रिय शासन-प्रशासन और भू-माफियाओं के कथित गठजोड़ का ज्वलंत प्रमाण है। पार्टी का आरोप है कि एक किसान को इस कदर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया कि उसे अपनी जान देने के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन सत्ता और पुलिस व्यवस्था आज भी असली जिम्मेदारों को बचाने में जुटी हुई है।

पार्टी ने प्रदेश सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि एसआईटी का गठन और कुछ छोटे पुलिस कर्मियों को निलंबित करना केवल जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। भाकपा(माले) का कहना है कि मृतक किसान द्वारा आत्महत्या से पूर्व लगाए गए गंभीर आरोप सीधे-सीधे शीर्ष अधिकारियों की भूमिका की ओर इशारा करते हैं, इसके बावजूद तत्कालीन एसएसपी उधम सिंह नगर के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई न होना यह साबित करता है कि जांच को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है।

भाकपा(माले) ने पुलिस व्यवस्था पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि आज प्रदेश में कानून का पैमाना दोहरा हो चुका है। आम किसान, मजदूर और गरीब के लिए कानून सख्त है, जबकि भू-माफिया और प्रभावशाली लोगों के लिए वही कानून नरम और लचीला दिखाई देता है। पुलिस की कार्यप्रणाली न्याय देने वाली संस्था की बजाय सत्ता और रसूखदारों की ढाल बनती जा रही है, जहां नीचे के कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जाता है और ऊपर बैठे अधिकारी हर कार्रवाई से बचे रहते हैं।

पार्टी ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक शीर्ष स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक किसी भी जांच को निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं माना जा सकता। इसी क्रम में भाकपा(माले) ने मांग की कि निष्पक्ष, दबाव-मुक्त और भरोसेमंद जांच सुनिश्चित करने के लिए उधम सिंह नगर के एसएसपी को तत्काल उनके पद से हटाया जाए, पूरे मामले में दोषियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवार को न्याय के साथ-साथ सुरक्षा की ठोस गारंटी दी जाए।

इस प्रतिनिधिमंडल में भाकपा(माले) के जिला सचिव ललित मटियाली, राज्य कमेटी सदस्य के.के. बोरा और किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आनंद सिंह नेगी शामिल रहे। नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने इस मामले में वास्तविक और ईमानदार कार्रवाई नहीं की तो भाकपा(माले) सड़क से लेकर सदन तक जनआंदोलन छेड़ेगी और किसान सुखवंत सिंह की मौत का सच हर मंच पर उजागर किया जाएगा।