

केंद्रीय बजट 2026 पर रुद्रपुर में सियासी घमासान: भाकपा(माले) के जिला महासचिव ललित मटियाली ने बताया जन-विरोधी और विस्थापन का नुस्खा, व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा ने कहा दिशाहीन और खोखला, महापौर विकास शर्मा बोले—‘विकसित भारत’ का मजबूत खाका



रुद्रपुर | 1 फरवरी
केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026 ने रुद्रपुर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखा टकराव खड़ा कर दिया है। बजट को लेकर शहर में साफ ध्रुवीकरण दिखाई दे रहा है। वामपंथी दलों और व्यापारिक संगठनों ने इसे आम जनता के खिलाफ और जमीनी सच्चाई से कटा हुआ बताया है, जबकि सत्तापक्ष इसे ‘विकसित भारत’ की दिशा में ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम करार दे रहा है। बजट ने राहत देने के बजाय असंतोष, बहस और राजनीतिक संघर्ष को और तेज कर दिया है।
भाकपा(माले) के जिला महासचिव ललित मटियाली ने बजट पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि तेज़ी से बढ़ती आर्थिक असमानता, भयावह बेरोज़गारी, घटती आमदनी और कमजोर होती क्रय शक्ति के दौर में पेश किया गया यह बजट 2026-27 अब तक के सबसे जन-विरोधी बजटों में से एक है। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ की चमकदार भाषा के पीछे असल में आम लोगों की ज़िंदगी, रोज़गार और आजीविका पर सुनियोजित हमला जारी है।
ललित मटियाली ने आरोप लगाया कि बजट में मज़दूरों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और आम जनता की बुनियादी ज़रूरतों को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया है। सामाजिक सुरक्षा और गरीबी उन्मूलन से जुड़ी योजनाओं के लिए आवंटन या तो घटा दिया गया है या स्थिर रखा गया है, जो बढ़ती महंगाई और ज़मीनी ज़रूरतों के मुकाबले बेहद अपर्याप्त है। कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और ग्रामीण-शहरी विकास जैसे अहम क्षेत्रों में वास्तविक खर्च बजट अनुमानों से कम रहा है, जो सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
भाकपा(माले) ने प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, ग्राम सड़क योजना और आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन जैसी योजनाओं में तय बजट से कम खर्च को जनकल्याण के प्रति सरकार की गैर-जिम्मेदाराना और संवेदनहीन सोच बताया। पार्टी का कहना है कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्रों में की गई मामूली बढ़ोतरी वास्तविक ज़रूरतों से बहुत पीछे है, जबकि उर्वरक और खाद्य सब्सिडी में कटौती का सीधा बोझ आम जनता पर डाला जा रहा है।
कृषि क्षेत्र को लेकर भाकपा(माले) ने बजट को पूरी तरह विफल करार दिया। पार्टी के अनुसार किसानों की आय, न्यूनतम समर्थन मूल्य, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, भंडारण और फूड प्रोसेसिंग जैसी बुनियादी ज़रूरतों पर बजट में कोई ठोस योजना नहीं है। ड्रोन, एआई और व्यावसायिक कृषि पर जोर को पार्टी ने कॉर्पोरेट-परस्त नीति बताया। कृषि अनुसंधान और शिक्षा के बजट में कटौती को किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रति सरकार की घोर उपेक्षा का प्रमाण बताया गया।
शिक्षा नीति पर भी तीखा हमला करते हुए भाकपा(माले) ने कहा कि सरकार शिक्षा को ज्ञान और सामाजिक चेतना का माध्यम नहीं, बल्कि उद्योगों के लिए सस्ता श्रम तैयार करने का औज़ार बना रही है। औद्योगिक गलियारों में एजुकेशनल टाउनशिप और कंटेंट लैब जैसी योजनाओं को छात्रों को कॉर्पोरेट जरूरतों के अनुसार ढालने की साजिश बताया गया।
महिलाओं, आदिवासियों और पर्यावरण के सवाल पर पार्टी ने चेताया कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी करोड़ों महिलाएं माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के कर्ज़ के जाल में फंसी हुई हैं, लेकिन बजट में उनके लिए कोई राहत नहीं है। डेटा सेंटर, रेयर अर्थ कॉरिडोर और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को टैक्स छूट देने से बड़े पैमाने पर ज़मीन अधिग्रहण, विस्थापन, भूजल संकट और पर्यावरण विनाश का खतरा और गहरा होगा।
भाकपा(माले) ने आरोप लगाया कि बजट अमीरों और कॉर्पोरेट घरानों को टैक्स राहत देता है, जबकि रोज़गार सृजन और आर्थिक असमानता जैसे मूल सवालों से जानबूझकर बचता है। सुपर रिच और बड़े कॉर्पोरेट मुनाफ़ों पर टैक्स बढ़ाने की मांग को एक बार फिर नज़रअंदाज़ कर दिया गया है। कुल बजट आकार में मामूली बढ़ोतरी और कर्ज़ के ब्याज भुगतान में खर्च होने वाला बड़ा हिस्सा सरकार की जन-विरोधी आर्थिक नीतियों को उजागर करता है।
इधर रुद्रपुर व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा ने भी बजट को लेकर सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने बजट को दिशाहीन और खोखला बताते हुए कहा कि व्यापारी, किसान, छात्र, बेरोज़गार और मध्यम वर्ग—किसी को भी इससे वास्तविक राहत नहीं मिली। महंगाई से जूझ रही जनता के लिए न कोई ठोस योजना है और न ही आमदनी बढ़ाने का कोई स्पष्ट रोडमैप। इनकम टैक्स स्लैब में राहत न मिलने और MSME सेक्टर को ज़मीनी मदद न मिलने से निराशा और गहरी हुई है। उन्होंने बजट के बाद शेयर बाजार में आई गिरावट को भी सरकार की नीतियों की विफलता बताया।
इसके विपरीत रुद्रपुर के महापौर विकास शर्मा ने बजट का बचाव करते हुए इसे ‘विकसित भारत’ की मजबूत नींव करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की दीर्घकालिक विकास यात्रा की ठोस कार्ययोजना है। महापौर का दावा है कि इंफ्रास्ट्रक्चर, परिवहन, स्वरोज़गार और स्टार्टअप योजनाओं के ज़रिये देश तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और युवाओं, किसानों व व्यापारियों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
कुल मिलाकर केंद्रीय बजट 2026 ने रुद्रपुर में राहत कम और सियासी टकराव ज़्यादा पैदा किया है। एक तरफ भाकपा(माले) और व्यापारिक संगठन इसे जन-विरोधी, विस्थापनकारी और कॉर्पोरेट-परस्त बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ सत्तापक्ष इसे नए भारत के निर्माण की बुनियाद करार दे रहा है। बजट ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि देश की आर्थिक दिशा को लेकर राजनीतिक संघर्ष और सामाजिक असंतोष आने वाले समय में और तेज़ होने वाला है।
