

“मौलाना जेल में, ‘कठमुल्ला’ कहने वाले विधायक बाहर! सपा का भाजपा सरकार पर हमला—अरविंद यादव ने पूछा, कानून सबके लिए बराबर क्यों नहीं?”


रुद्रपुर, 31 अगस्त 2026। जुलूस के दौरान कथित विवादित बयान को लेकर मौलाना की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद अब मामला राजनीतिक रूप से भी गरमाता जा रहा है। समाजवादी पार्टी यूथ ब्रिगेड के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद यादव ने मौलाना की गिरफ्तारी को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कार्रवाई में समानता का सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि जुलूस के दौरान मौलाना की ओर से ऐसा कोई वक्तव्य नहीं दिया गया था, जिससे किसी वर्ग की जनभावनाएं आहत होती हों, इसके बावजूद उनके खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई कर उन्हें जेल भेज दिया गया।
अरविंद यादव ने जारी बयान में आरोप लगाया कि भाजपा सरकार द्वारा इस मामले में अपनाया गया रवैया एकतरफा और दमनकारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी विवादित बयान की स्थिति में कानून अपना काम करे, लेकिन कार्रवाई का आधार राजनीतिक पहचान या समुदाय नहीं होना चाहिए। सपा नेता के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति के बयान को लेकर पुलिस और प्रशासन कानूनी कार्रवाई करता है तो उसी कसौटी पर दूसरे नेताओं और जनप्रतिनिधियों के बयानों की भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौलाना की गिरफ्तारी से अल्पसंख्यक समाज में भय और असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है। अरविंद यादव ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जिम्मेदारी समाज के सभी वर्गों को समान सुरक्षा और न्याय का भरोसा देना है। उन्होंने सरकार से अपील की कि किसी भी मामले में कार्रवाई तथ्यों, साक्ष्यों और कानून के आधार पर हो तथा राजनीतिक दबाव या पक्षपात की कोई गुंजाइश न रहे।
सपा राष्ट्रीय महासचिव ने भाजपा विधायक शिव अरोड़ा के कथित बयान को लेकर भी सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रूप से मुस्लिम समाज के लिए ‘कठमुल्ला’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाना आपत्तिजनक और अमर्यादित है। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों से समाज में शांति, भाईचारे और सद्भाव को मजबूत करने वाली भाषा की अपेक्षा की जाती है। अरविंद यादव ने आरोप लगाया कि इस तरह की भाषा से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है और अलग-अलग समुदायों के बीच अविश्वास पैदा हो सकता है।
अरविंद यादव ने सरकार से सीधा सवाल किया कि यदि मौलाना के कथित बयान को लेकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा सकती है और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जा सकता है, तो विधायक शिव अरोड़ा के कथित बयान की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं की जा रही। उन्होंने कहा कि यदि विधायक के बयान में भी कानून का उल्लंघन पाया जाता है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
सपा नेता ने कहा कि कानून का राज तभी मजबूत होता है जब वह हर व्यक्ति के लिए समान रूप से लागू हो। उन्होंने सरकार से मांग की कि मौलाना के मामले और विधायक के कथित बयान दोनों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जांच में जो तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय की भावनाओं से खिलवाड़ करने वाली भाषा या बयानबाजी को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
अरविंद यादव ने यह भी कहा कि सत्ता में बैठे लोगों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि उनके शब्दों का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में नेताओं को बयान देते समय संवैधानिक मर्यादा और सामाजिक जिम्मेदारी का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने सरकार से दोहरे मापदंड की धारणा को समाप्त करने और सभी मामलों में समान कानूनी प्रक्रिया अपनाने की मांग की।
मौलाना की गिरफ्तारी के बाद सामने आई सपा की यह प्रतिक्रिया मामले को लेकर जारी राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार और पुलिस प्रशासन इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और भाजपा विधायक के कथित बयान को लेकर कोई कानूनी कार्रवाई होती है या नहीं। फिलहाल सपा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मुद्दे को कार्रवाई में समानता और कानून के समान अनुप्रयोग के सवाल से जोड़कर सरकार के सामने उठाती रहेगी।

