4 श्रम संहिताओं के खिलाफ आशा वर्कर्स का बड़ा ऐलान, 12 फरवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में पूरी ताकत से उतरेंगी आशाएं गदरपुर में बैठक कर चिकित्साधिकारी को दिया हड़ताल का नोटिस, रुद्रपुर गल्ला मंडी में होगा प्रदर्शन।

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4 श्रम संहिताओं के खिलाफ आशा वर्कर्स का बड़ा ऐलान, 12 फरवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में पूरी ताकत से उतरेंगी आशाएं


गदरपुर में बैठक कर चिकित्साधिकारी को दिया हड़ताल का नोटिस, रुद्रपुर गल्ला मंडी में होगा प्रदर्शन।

गदरपुर, 10 फरवरी।

मजदूर अधिकारों पर आज़ादी के बाद के सबसे बड़े हमले के खिलाफ चार श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग को लेकर 12 फरवरी को होने वाली राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल में उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) पूरी ताकत से शामिल होगी। इसे लेकर यूनियन की गदरपुर ब्लॉक कमेटी की बैठक आयोजित की गई, जिसमें हड़ताल में शामिल होने का निर्णय लेते हुए संबंधित चिकित्साधिकारी को विधिवत नोटिस सौंपा गया।

बैठक को संबोधित करते हुए उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) की जिला उपसचिव अनीता अन्ना ने कहा कि मोदी सरकार मजदूरों और महिला कामगारों के अधिकारों पर लगातार हमले कर रही है। आशा वर्कर्स की हालत सभी उत्पीड़ित श्रमिकों में सबसे बदतर है। उन्हें आज तक श्रमिक का दर्जा नहीं दिया गया और बंधुआ मजदूरों की तरह काम लिया जा रहा है। सरकार लगातार आशा वर्कर्स पर नए-नए कामों का बोझ डाल रही है, जबकि उनके बदले उन्हें नियमित वेतन तक नहीं दिया जाता।

उन्होंने कहा कि शिशु मृत्यु दर कम करने, गर्भवती महिलाओं की देखभाल और स्वास्थ्य योजनाओं को ज़मीन पर उतारने में आशा वर्कर्स की भूमिका बेहद अहम है। आधी रात में भी बिना किसी विभागीय सहायता के आशाओं को घर-घर दौड़ना पड़ता है, लेकिन इसके बदले उन्हें केवल नाममात्र की प्रोत्साहन राशि और योजनाओं का कमीशन दिया जाता है। यह खुला शोषण किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

अनीता अन्ना ने बताया कि 12 फरवरी को ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत अखिल भारतीय आम हड़ताल में आशा वर्कर्स रुद्रपुर गल्ला मंडी में प्रदर्शन करेंगी। हड़ताल के माध्यम से चार श्रम कोड वापस लेने, आशा वर्कर्स को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम 35 हजार रुपये मासिक वेतन, रिटायरमेंट के समय पेंशन, अस्पतालों में सम्मानजनक व्यवहार, प्रशिक्षण स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वयं कराए जाने, एनजीओ के हस्तक्षेप को बंद करने, प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन न्यूनतम 500 रुपये भुगतान, सभी बकाया राशि का भुगतान तथा हर माह का मानदेय समय पर खाते में डालने जैसी मांगें प्रमुख रूप से उठाई जाएंगी।

यूनियन की जिला अध्यक्ष ममता पानू ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार आशा वर्कर्स को न्यूनतम वेतन और कर्मचारी का दर्जा न देकर उनका आर्थिक शोषण कर रही हैं। जिस सरकार की जिम्मेदारी अपने कर्मचारियों के शोषण से रक्षा करने की है, वही सरकार उनका शोषण करे, इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण कुछ नहीं हो सकता। भाजपा सरकार के शासनकाल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का बजट लगातार कम किया गया है, जिससे आशाओं की समस्याएं और गंभीर होती जा रही हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि हड़ताल के माध्यम से मुख्यमंत्री द्वारा खटीमा में आशा यूनियन के समक्ष डीजी हेल्थ के प्रस्ताव को लागू करने के दिए गए आश्वासन को अमल में लाने की मांग की जाएगी। आशा वर्कर्स को नियमित वेतन, पक्की नौकरी और सम्मान चाहिए, इससे कम कुछ भी मंजूर नहीं है। इसी संकल्प के साथ आशाएं 12 फरवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में पूरी मजबूती से शामिल होंगी।

बैठक में ब्लॉक कोषाध्यक्ष लक्ष्मी देवी सहित राधारानी, सुमन, अमन कौर, फातिमा, सुरेंद्र कौर, सरिता देवी, रामेश्वरी देवी, शमीम जहां, सुषमा रानी, नीलम रानी, सुनीता रानी, आरती अरोरा समेत बड़ी संख्या में आशा वर्कर्स मौजूद रहीं।