रुद्रपुर में दिनदहाड़े राइफल से हत्या: खाकी के खौफ का खात्मा, अपराधियों के हौसले बुलंद, कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल।
रुद्रपुर -उत्तराखंड के जनपद ऊधमसिंहनगर का जिला मुख्यालय रुद्रपुर एक बार फिर खून से लाल हो गया। कोतवाली से महज़ कुछ ही दूरी पर दिनदहाड़े राइफल से ताबड़तोड़ फायरिंग कर एक निर्दोष मजदूर की नृशंस हत्या कर दी गई। सुबह करीब 10 बजे हुई इस सनसनीखेज वारदात ने न सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी साफ कर दिया है कि अब अपराधियों के जेहन से खाकी का डर लगभग खत्म हो चुका है।
बेख़ौफ बदमाशों ने खुले खेत में फिल्मी अंदाज़ में दर्जनों राउंड गोलियां बरसाईं। जिस वक्त गोलियों की गूंज पूरे इलाके में फैल रही थी, उस समय कोतवाली पुलिस को भनक तक नहीं लगी। जब तक पुलिस हरकत में आती, तब तक हत्यारे हथियारों सहित फरार हो चुके थे। मौके पर पहुंची पुलिस टीम के सामने सिर्फ खोखे बटोरने और खानापूर्ति करने की स्थिति रह गई—मानो “सांप निकल जाने के बाद लकीर पीटी जा रही हो।”
पुलिस को घटनास्थल से आधा दर्जन से अधिक राइफल के खोखे मिले हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वारदात जमीनी विवाद से जुड़ी है। जिस खेत में गोलीबारी हुई, वहां बटाई पर काम करने वाले व्यक्ति की नीयत खराब हो गई थी। जमीन पर कब्जा करने की मंशा से पहले उसने कानूनी दांव-पेच आजमाए, लेकिन जब कोर्ट से उसे सफलता नहीं मिली तो उसने अपराध का रास्ता चुना। आज जब जमीन मालिक खेत जोतने और तारबाड़ करने पहुंचा, तो बटाईदार अपने गुर्गों के साथ मौके पर पहुंचा और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
इस गोलीबारी में मूल रूप से बिहार निवासी एक गरीब मजदूर, जो ट्रैक्टर चलाकर रोजी-रोटी कमा रहा था, राइफल की गोली लगने से मौके पर ही ढेर हो गया। खेत में काम कर रहा वह श्रमिक किसी विवाद का पक्षकार नहीं था, फिर भी उसे अपनी जान गंवानी पड़ी। यह हत्या सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था, मानवता और पुलिस व्यवस्था की भी हत्या है।
घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बदमाश इस तरह गोलियां चला रहे थे जैसे दीपावली पर पटाखे फोड़े जाते हैं। शहर में भय और आक्रोश दोनों व्याप्त हैं। सवाल यह है कि जब कोतवाली के इतने पास इस तरह की वारदात हो सकती है, तो दूर-दराज़ इलाकों की सुरक्षा का क्या हाल होगा?
यह कोई पहली घटना नहीं है। रुद्रपुर और तराई क्षेत्र में बीते लंबे समय से अपराध लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हत्या, फायरिंग, लूट और जमीन कब्जाने की घटनाएं आम होती जा रही हैं। आरोप लगते रहे हैं कि कई मामलों में पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही है। “सेटिंग–गेटिंग” के आरोपों के बीच कई संगीन मामले या तो कमजोर धाराओं में दर्ज होते हैं या फिर समय के साथ रफा-दफा हो जाते हैं।
गल्ला मंडी में हुआ दोहरी हत्याकांड आज भी लोगों के ज़ेहन में ताजा है, जहां पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे थे। चर्चाएं रहीं कि मामले को प्रभावशाली लोगों के दबाव में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। ऐसे उदाहरणों ने अपराधियों के हौसले और बढ़ा दिए हैं। उन्हें यह भरोसा हो गया है कि या तो कार्रवाई होगी ही नहीं, और अगर हुई भी तो उसे किसी न किसी तरह “मैनेज” कर लिया जाएगा।
पुलिस के बहुचर्चित “ऑपरेशन लंगड़ा” पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। दिनदहाड़े राइफल से हत्या करने वाले अपराधी इस ऑपरेशन को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं। अगर ऐसे मामलों में अपराधियों के खिलाफ सख्त, निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो कानून का इकबाल और कमजोर पड़ेगा।
रुद्रपुर को आज एक बार फिर ऐसे ईमानदार, सशक्त और कानून का सख्ती से पालन कराने वाले पुलिस नेतृत्व की जरूरत है, जैसा कभी जिले को सदानंद दा ते जैसे कप्तान के रूप में मिला था। उनके कार्यकाल में अपराधियों में खौफ था और कानून का सम्मान। लंबे समय से जिले की कप्तानी में वैसी दृढ़ इच्छाशक्ति और निष्पक्षता नजर नहीं आ रही है।
कुल मिलाकर, रुद्रपुर की यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि सिस्टम के लिए चेतावनी है। अगर अब भी अपराधियों को उन्हीं की भाषा में जवाब नहीं दिया गया, अगर पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और सख्ती नहीं आई, तो रुद्रपुर और तराई क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो सकती है। जनता का भरोसा तभी लौटेगा, जब खाकी फिर से खौफ की नहीं, भरोसे और न्याय की पहचान बनेगी।
