रुद्रपुर में एपवा की गोष्ठी: महिला कामगारों को अधिकार और सम्मान देने की उठी मांग

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रुद्रपुर में एपवा की गोष्ठी: महिला कामगारों को अधिकार और सम्मान देने की उठी मांग

रुद्रपुर, 8 मार्च 2026।

अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संगठन (एपवा) ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं के ऐतिहासिक संघर्षों को याद करते हुए एक गोष्ठी आयोजित की। इस दौरान महिला कामगारों को उनके अधिकार और सम्मान दिलाने की मांग उठाई गई।

एपवा संयोजक शोभना ने गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास महिला मजदूर आंदोलनों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि मार्च 1908 के महिला मजदूर आंदोलन, 28 फरवरी 1909 के आंदोलन, 1910 में डेनमार्क में आयोजित महिलाओं के सम्मेलन, 8 मार्च 1914 को यूरोप की महिलाओं के युद्ध विरोधी प्रदर्शन और 8 मार्च 1917 को रूस की कामगार महिलाओं की हड़ताल जैसे ऐतिहासिक संघर्षों से यह दिवस जुड़ा है। “रोटी और शांति” के लिए हुई उस हड़ताल ने रूस के जारशाही शासन को भी चुनौती दी थी। उन्होंने कहा कि 1913 से हर वर्ष 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पूरी दुनिया में मनाया जाता है, जो कामकाजी महिलाओं के अधिकारों और उनके संघर्षों को याद करने का दिन है।

बार काउंसिल सदस्य अमनदीप कौर ने कहा कि जिन अधिकारों के लिए महिलाओं ने लंबा संघर्ष किया, आज पूंजीवादी और साम्राज्यवादी नीतियां उन अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं और मजदूरों ने 8 घंटे काम के अधिकार के लिए लड़ाई लड़ी थी, लेकिन आज नए श्रम कानूनों के जरिए मजदूरों से 12–12 घंटे काम कराया जा रहा है।

प्रीति मौर्य ने कहा कि समाज में महिलाओं को लंबे समय तक संपत्ति या वस्तु के रूप में देखा गया। संघर्षों के बाद महिलाओं ने कुछ अधिकार जरूर हासिल किए हैं, लेकिन आज भी समाज में उनकी स्थिति दोयम दर्जे की बनी हुई है। उन्होंने कहा कि समाज अब भी पितृसत्ता और पुरुषवादी सोच से जकड़ा हुआ है, जिसके कारण महिलाओं के साथ भेदभाव और अपमान की घटनाएं जारी हैं।

उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की जिला उपसचिव अनीता अन्ना ने कहा कि महिलाओं को उद्योगों और सरकारी विभागों में बराबर वेतन नहीं मिलता। आशा, आंगनबाड़ी और भोजनमाता जैसी स्कीम वर्कर्स का सरकार खुद ही शोषण कर रही है। उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों को न तो राज्य कर्मचारी का दर्जा मिला है और न ही न्यूनतम वेतन। आशा वर्कर्स से स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य कई विभागों के काम लिए जाते हैं, लेकिन उन्हें उचित वेतन और सम्मान नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि लंबे समय से आशा वर्कर्स राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं।

इस अवसर पर अमनदीप कौर, शोभना, प्रीति मौर्य, अनीता अन्ना, नीरज कुमारी, अंकिता पासवान, कृतिका, सौम्यता, अर्चना, पुष्पा मौर्य, पूनम, ललित मटियाली और उत्तमदास समेत कई लोग मौजूद रहे।