

तथाकथित रिश्वतकांड निकला राजस्व वसूली का मामला? 21 घंटे बाद खत्म हुआ सितारगंज तहसील का हाईवोल्टेज ड्रामा, विजिलेंस ने दोनों कर्मचारियों को छोड़ा
सितारगंज तहसील में कथित रिश्वतखोरी के आरोपों को लेकर बुधवार से शुरू हुआ हाईवोल्टेज घटनाक्रम गुरुवार सुबह करीब 21 घंटे बाद समाप्त हो गया। किसान की शिकायत के आधार पर विजिलेंस टीम ने वरिष्ठ सहायक भूपेंद्र सिंह राणा और संग्रह अमीन मदन लाल शर्मा को हिरासत में लिया था। कार्रवाई की सूचना मिलते ही तहसील के राजस्व कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और धरने पर बैठ गए। देखते ही देखते जिलेभर से राजस्व कर्मचारी, विभिन्न कर्मचारी संगठन तथा भूपेंद्र सिंह राणा के गांव के ग्रामीण भी समर्थन में तहसील परिसर पहुंच गए, जिससे पूरे क्षेत्र का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
स्थिति को देखते हुए तहसील परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। रातभर चले गतिरोध के बीच प्रशासन, कर्मचारी संगठनों और विजिलेंस अधिकारियों के बीच लगातार बातचीत होती रही। गुरुवार सुबह एसडीएम तुषार सैनी की मौजूदगी में राजस्व अधिकारियों, कर्मचारी नेताओं और विजिलेंस टीम के बीच लंबी वार्ता हुई, जिसके बाद विजिलेंस टीम ने दोनों कर्मचारियों को मुक्त कर दिया और पुलिस सुरक्षा के बीच तहसील परिसर से रवाना हो गई।
एसडीएम तुषार सैनी ने बताया कि जिस धनराशि को प्रथम दृष्टया रिश्वत के रूप में देखा गया था, वह राजस्व विभाग की वैधानिक ऋण वसूली प्रक्रिया से संबंधित राशि थी। उनके अनुसार विभागीय कार्यप्रणाली की पूरी जानकारी न होने के कारण भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई। वहीं विजिलेंस प्रभारी प्रभात कुमार ने स्पष्ट किया कि मामला अभी जांच के अधीन है और अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
इस घटनाक्रम ने पूरे जिले में चर्चा का विषय बना दिया। एक ओर कर्मचारी संगठन इसे विभागीय प्रक्रिया की गलतफहमी बता रहे हैं, तो दूसरी ओर विजिलेंस का कहना है कि जांच अभी समाप्त नहीं हुई है। ऐसे में अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि मामला वास्तव में रिश्वतखोरी का था या राजस्व वसूली की वैधानिक प्रक्रिया को लेकर उत्पन्न हुआ भ्रम।




