

…तो पहली बार दीपावली मनेगी ‘रुद्रपुर के गरीब’ की ? – राजनीतिक उठा पटक एवं आरोप प्रत्यारोप के बीच नगर में निकल कर सामने आया एक नया विमर्श.



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रुद्रपुर , स्थानीय गांधी पार्क में दिवाली मेला आयोजित किए जाने के बाद से शहर में मची राजनीतिक उठा पटक एवं परस्पर आरोप- प्रत्यारोप के दौर के बीच, नगर में एक नया विमर्श निकलकर सामने आया है कि रुद्रपुर के गरीबों की दीपावली इस दफा पहली बार मनेगी. देखा जाए तो दीपावली से संबंधित इस विमर्श का प्रत्यक्ष संबंध छोटे व्यापारियों को गांधी पार्क के दीपावली मेले में स्थान आवंटन एवं मेले में होने वाली आय से है ,
लेकिन अपरोक्ष रूप से इस विमर्श का एक पहलू यह भी निकल कर सामने आता है कि शायद अब से पहले रुद्रपुर के दीपावली बाजार में गरीब एवं छोटे व्यापारियों को उचित स्थान और सम्मान नहीं मिला और ना ही आज से पहले उन्होंने दीपावली के अवसर पर रुद्रपुर के बाजार से कोई धनोपाजर्न ही किया है, लिहाजा गरीबों की दीपावली बेहतर करने की गरज से उनके लिए गांधी पार्क में एक दीपावली मेला आयोजित करके उन्हें व्यापार करने का अवसर दिया गया है. यद्यपि प्रथम दृष्टया यह छोटे व्यापारियों के एक समूह को मुख्य बाजार से पृथक कर देने का स्पष्ट मामला दीख पड़ता है, फिर भी तर्क तो यही दिया जा रहा है कि इससे छोटे और बड़े व्यापारियों के बीच विभाजन नहीं होगा. इसका एक फायदा भी यह भी बताया जा रहा है कि इससे मुख्य बाजार में जाम की समस्या नहीं होगी और लोग बिना धक्का मुक्की के आसानी से खरीदारी कर सकेंगे. जहां तक जाम की समस्या से निदान के लिए छोटे व्यापारियों को गांधी पार्क में स्थान देने का तर्क है, तो यह तर्क तनिक बेमानी- सा प्रतीत होता है. वह इसलिए, क्योंकि तीन दिवसीय दीपावली उत्सव की दौरान होने वाली भीड़भाड़ और जाम की स्थिति रुद्रपुर शहर और रुद्रपुर के मुख्य बाजार के लिए कभी भी कोई बड़ा सिर दर्द नहीं रही और प्राय: हर दीपावली में रुद्रपुर बाजार ने इस भीड़भाड़ का बाहें फैलाकर स्वागत किया है और वर्तमान में तो मुख्य बाजार की सड़के पहले की अपेक्षा चौड़ी भी हो गई है, इसलिए तीन दिन के उत्सव के लिए जाम की दुहाई देना गले नहीं उतरता .वैसे रुद्रपुर शहर ने तो बिना किसी हो- हल्ला और बिना किसी को दर्द दिए तब भी दीपावली मनाई है, जब मुख्य बाजार की सड़क बहुत सकरी- सकरी थी .उस वक्त भी रुद्रपुर के अमीर- गरीब, स्त्री- पुरुष, बच्चे -बुजुर्ग ने उत्साह पूर्वक दीपावली मनाई है और दीपावली के उल्लास को भरपूर तरीके से जिया है. अब से पहले शहर में दीपावली का बाजार, मुख्य बाजार तिराहे से लेकर भगत सिंह चौक तक और वीर हकीकत राय मार्ग, दुर्गा मंदिर गली, हरि मंदिर गली, मटके वाली गली तथा अग्रवाल धर्मशाला वाली गली, पांच मंदिर वाली गली, गुप्ता मेडिकल वाली गली तथा हंसराज डेरी वाली गली तक हमेशा ही सजा करता था. इतना ही नहीं, मेंन मार्केट तिराहे से गांधी पार्क के बाजार तरफ वाले मुख्य गेट तक भी दीपावली बाजार का विस्तार हुआ करता था.खास बात तो यह है कि उस समय गांधी पार्क की दीवार के साथ तमाम चाट – पकोड़े और अन्य खाद्य सामग्री के ठेले भी लगा करते थे, बावजूद इसके रुद्रपुर शहर की दीपावली बिना किसी हटो- बचो अभियान के और बिना छोटे- बड़े व्यापारी में भेद किए, हंसी-खुशी मनाई जाया करती थी. तब नगर का बाजार सभी प्रकार के व्यापार के सह- अस्तित्व को अपने आप में समोया करता था और दीपावली के पावन पर्व पर हर व्यापारी को भर- भर कर पैसा पैदा भी करके देता था. उपभोक्ता जब दीपावली की खरीदारी करने बाजार आता था, तो वह बाजार की सड़कों पर घूमते- घूमते दीपक और मामबत्तियां तथा सजावट एवं पूजा की सामग्री तो खरीद ही लेता था, साथ ही इच्छा हुई तो मिठाई की दुकान में भी घुस गया, कपड़े की दुकान में चला गया, जेवर खरीदने ज्वेलरी शॉप में चला गया, बर्तन की दुकान में चला गया, कुछ चटपटा खाने की इच्छा हुई तो परिवार सहित चैट पकोड़े भी खा लिए. उस समय कोई भी वास्तु क्रय करने के लिए उपभोक्ता को कोई स्पेशल एफर्ट नहीं करना पड़ता था. उसे इस बात की टेंशन नहीं होती थी, कि फला जगह पूजन सामग्री मिलेगी और फल जगह चाट- पकौड़े तथा फला जगह इलेक्ट्रॉनिक आइटम व्यक्ति दीपावली पर बाजार की रौनक देखते-देखते परिवार सहित घूम घूम कर पूरा दीपावली उत्सव के मजे ले लेता था. उस वक्त भी रुद्रपुर शहर में चार पहिया में सवार होकर बाजार भ्रमण करने और खरीदारी करने का चलन था, लेकिन किसी को किसी से कोई दिक्कत नहीं होती थी. कोई चिल्ला चोट नहीं होती थी. आज की तरह जाम का कोई रोना धोना नहीं होता था. बस धनतेरस के रोज से बाजार में चार पहिया वाहनों की नो एंट्री कर दी जाया करती थी. दो-तीन दिन की थोड़ी सी बहुत समस्या होती थी. सो, पूरा शहर और बाजार के लोग इस समस्या को हंसते-हंसते झेल लिया करते थे. मजे की बात तो यह है कि पिछले साल तक आसपास के गांव के छोटे-मोटे व्यापारी और सिर्फ दीपावली के त्योहार पर ग्रामीण उत्पाद बेचने वाले गरीब लोग भी रुद्रपुर बाजार में आकर व्यापार करते थे और घर जाकर आनंदपूर्वक दीपावली मनाते थे. ऐसे में किसी के भी मन में यह जिज्ञासा होनी स्वाभाविक है कि इस दीपावली में ऐसा क्या खास होने जा रहा है ,जिससे शहर के गरीबों को यह लगेगा कि उन्होंने पहली बार दीपावली मनाई है.
