किच्छा पालिका चुनाव में चार चेहरे आमने-सामने, संदीप अरोड़ा और राजेश प्रताप सिंह के सामने टाकुली-जक्कू की चुनौती; 2027 के सेमीफाइनल में तिलक बेहड़ और भाजपा की अग्निपरीक्षा

किच्छा पालिका चुनाव में चार चेहरे आमने-सामने, संदीप अरोड़ा और राजेश प्रताप सिंह के सामने टाकुली-जक्कू की चुनौती; 2027 के सेमीफाइनल में तिलक बेहड़ और भाजपा की अग्निपरीक्षा


किच्छा। नगर पालिका चुनाव में रविवार को नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अध्यक्ष पद की तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है। अब चुनाव मैदान में चार प्रत्याशी आमने-सामने हैं। भाजपा ने संदीप अरोड़ा को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस की ओर से राजेश प्रताप सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं निर्दलीय प्रत्याशियों के रूप में नरेंद्र सिंह टाकुली उर्फ तारी टाकुली और राशिद अहमद उर्फ जक्कू ने चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

नाम वापसी के बाद किच्छा का चुनाव अब सीधे तौर पर भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबले तक सीमित नहीं रह गया है। निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी ने दोनों प्रमुख दलों के समीकरणों को उलझा दिया है। राजनीतिक गलियारों में नरेंद्र टाकुली को भाजपा के लिए चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि राशिद अहमद उर्फ जक्कू भी चुनावी गणित को प्रभावित करने की स्थिति में नजर आ रहे हैं। ऐसे में चारों प्रत्याशियों के बीच होने वाला मुकाबला कितना कड़ा होगा, इसका अंदाजा चुनाव प्रचार के साथ और स्पष्ट होगा।

किच्छा नगर पालिका चुनाव को आगामी 2027 विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल भी माना जा रहा है। यही वजह है कि यह चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। चुनाव में जीत जहां संबंधित दल के लिए राजनीतिक संजीवनी का काम करेगी, वहीं हार आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर भी असर डाल सकती है।

भाजपा की ओर से जिला अध्यक्ष समेत पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता चुनावी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। वहीं कांग्रेस की ओर से किच्छा के वर्तमान विधायक तिलक राज बेहड़ ने भी चुनाव को लेकर अपने राजनीतिक गुणा-भाग शुरू कर दिए हैं। दोनों ही अनुभवी राजनीतिक खेमे अपने-अपने दांव-पेंच आजमाने में जुटे हैं और आने वाले दिनों में चुनावी प्रचार के साथ मुकाबला और रोचक होने की संभावना है।

हालांकि किच्छा नगर पालिका चुनाव को लेकर 17 सितंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है और चुनाव का अंतिम स्वरूप न्यायालय के निर्णय पर भी निर्भर करेगा। ऐसे में अदालत का फैसला भी इस चुनाव की आगे की तस्वीर तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

किच्छा में करीब तीन साल की देरी के बाद नगर पालिका चुनाव हो रहे हैं। अध्यक्ष पद के चार प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करीब 52 हजार मतदाता करेंगे, जबकि नगर पालिका के 20 वार्डों में भी प्रत्याशी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगे। अब निगाहें चुनाव प्रचार, बदलते समीकरणों और मतदाताओं के रुख पर टिकी हैं।

किच्छा की जनता किस प्रत्याशी पर भरोसा जताती है और किसके पक्ष में अपना फैसला सुनाती है, इसका खुलासा 24 सितंबर को मतगणना के बाद होगा। फिलहाल इतना तय है कि किच्छा का यह चुनाव केवल पालिका की कुर्सी का मुकाबला नहीं, बल्कि आने वाले 2027 के बड़े राजनीतिक रण की जमीन तैयार करने वाला अहम मुकाबला बन चुका है।