68 दिन से बेटी गायब, पुलिस पूछ रही ‘सबूत लाओ’ भाकपा माले के नेतृत्व में हुआ कोतवाली सितारगंज का घेराव, कोतवाल से तीखी बहस,नारायण पाल और मोहित चोपड़ा भी समर्थन में उतरे

68 दिन से बेटी गायब, पुलिस पूछ रही ‘सबूत लाओ’! कोतवाली घेराव में फूटा आक्रोश, नारायण पाल और मोहित चोपड़ा भी समर्थन में उतरे
सितारगंज, 10 सितंबर। 13 वर्षीय नाबालिग बालिका के कथित अपहरण को 68 दिन बीत जाने के बावजूद बरामदगी न होने से सितारगंज में लोगों का आक्रोश सड़क पर उतर आया। भाकपा(माले) के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों ने मंडी से कोतवाली तक जुलूस निकालकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और कोतवाली का घेराव करते हुए बालिका को जल्द से जल्द सुरक्षित बरामद करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान “पुलिस-प्रशासन होश में आओ, दो माह से अपहृत बालिका का पता लगाओ” और “पॉक्सो अपराध के बावजूद पुलिस का गैर-जिम्मेदाराना और असंवेदनशील रवैया नहीं चलेगा” जैसे नारे गूंजते रहे।
भाकपा(माले) राज्य कमेटी सदस्य आनंद नेगी ने आरोप लगाया कि 68 दिन से नाबालिग बालिका के लापता होने के बावजूद उसका और कथित आरोपी का कोई पता नहीं लगना पुलिस की नाकामी है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मामले में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई और बालिका की तलाश के लिए अतिरिक्त प्रयास भी नहीं किए गए। उनका आरोप था कि पुलिस का रवैया पीड़ित परिवार के प्रति भी संवेदनशील नहीं रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कोतवाल के साथ हुई बातचीत के दौरान कथित तौर पर दिए गए बयानों पर भी कड़ी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि कोतवाल ने बातचीत के दौरान “लड़की की मां ने खुद भगाया है”, “आप सबूत लाओ, हम पकड़कर ले आएंगे” और “लड़की की अपनी सहमति है” जैसी बातें कहीं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ऐसे कथित बयान पुलिस की संवेदनशीलता और जांच की गंभीरता पर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि 13 वर्षीय नाबालिग के मामले में उसकी कथित सहमति को आधार बनाकर जांच को प्रभावित नहीं किया जा सकता और बालिका की तलाश कर साक्ष्य जुटाना पुलिस की जिम्मेदारी है, न कि पीड़ित परिवार की।
कोतवाल के कथित रवैये से नाराज भाकपा(माले) नेताओं ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष शिकायत करने और कोतवाल को हटाने की मांग उठाई। उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन संबद्ध एक्टू की जिला उपसचिव अनीता अन्ना ने कहा कि 13 वर्ष की नाबालिग बालिका के मामले में उसकी सहमति का कोई कानूनी आधार नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मामले की खोजबीन करना, साक्ष्य जुटाना और बालिका को बरामद करना पुलिस की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले को भटकाने के बजाय पुलिस को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए और पीड़ित परिवार के साथ संवेदनशील व्यवहार करना चाहिए।
भाकपा(माले) जिलासचिव ललित मटियाली ने आरोप लगाया कि पुलिस के रवैये और बातचीत के दौरान सामने आई बातों से ऐसा प्रतीत होता है कि मामले में ढिलाई बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि 68 दिन का समय बीत जाने के बाद भी बालिका का सुराग न मिलना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मामले की जांच की समीक्षा कराने और नाबालिग बालिका की जल्द से जल्द सुरक्षित बरामदगी सुनिश्चित करने की मांग की।
आंदोलन को कांग्रेस के पूर्व विधायक नारायण पाल और बॉडीबिल्डर मोहित चोपड़ा ने भी समर्थन दिया। दोनों ने नाबालिग बालिका की जल्द बरामदगी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग उठाई। प्रदर्शन में एक्टू जिला सचिव अनीता अन्ना, आइसा राज्य सचिव धीरज कुमार, भाकपा(माले) नेता विष्णुपद साना व जिशान अली, उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की राज्य उपाध्यक्ष रीता कश्यप, पूर्व जिला सचिव कुलविंदर कौर, गोविंदा, शादाब, कुलदीप सिंह, किसान सभा (लोकतंत्र) के जागीर सिंह, इमरान खान, राशिद, खुशनुमा, जैफ, रहीमा, शबाना, सबीना, सलमान सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 13 वर्षीय बालिका की सुरक्षित बरामदगी तक आवाज उठाई जाती रहेगी और यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।