

दलगत राजनीति-अराजकता के सवालों के बीच चुनावी रंग में रंगा रुद्रपुर डिग्री कॉलेज, गाड़ियों के काफिलों और बैनर-पोस्टरों से पटा शहर; विश्वजीत का उपाध्यक्ष और गौरव शर्मा का सांस्कृतिक सचिव बनना तय, पर्चे वैध मिले तो होंगे निर्विरोध, 29 को मतदान
रुद्रपुर। छात्रसंघ चुनाव को राजनीति की पहली सीढ़ी माना जाता है और छात्र जीवन में राजनीतिक चेतना का विकास नेतृत्व क्षमता, लोकतांत्रिक समझ और चरित्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है। छात्रसंघ चुनाव का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी समस्याओं, अधिकारों और हितों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने का मंच देना है, लेकिन समय-समय पर छात्र राजनीति में दलगत प्रभाव, धनबल, बाहरी हस्तक्षेप और अराजकता को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में इस बार रुद्रपुर डिग्री कॉलेज का छात्रसंघ चुनाव इन तमाम चर्चाओं के बीच खासा महत्वपूर्ण हो गया है।
रुद्रपुर डिग्री कॉलेज में चुनावी माहौल अब पूरी तरह रंग पकड़ चुका है। कॉलेज परिसर से लेकर शहर की सड़कों तक छात्र नेताओं और प्रत्याशियों की सक्रियता दिखाई दे रही है। दिनभर गाड़ियों के काफिलों की रफ्तार, छात्र समर्थकों की आवाजाही और बैनर-पोस्टरों से सजे शहर ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है। छात्र-छात्राओं के बीच विभिन्न पदों को लेकर चर्चाएं तेज हैं और प्रत्याशी अपने-अपने स्तर पर समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं।
छात्रसंघ चुनावों को लेकर लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का पालन भी हमेशा महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। इन सिफारिशों का उद्देश्य छात्रसंघ चुनावों में अनुशासन, पारदर्शिता और मर्यादा बनाए रखना तथा चुनाव को अनावश्यक बाहरी प्रभाव से दूर रखना था। ऐसे में चुनावी गतिविधियों के दौरान नियमों के पालन को लेकर कॉलेज प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। किसी भी नियम के उल्लंघन का अंतिम निर्धारण हालांकि संबंधित चुनाव प्राधिकरण की जांच और आधिकारिक कार्रवाई के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
इसी चुनावी माहौल के बीच रुद्रपुर डिग्री कॉलेज में उपाध्यक्ष और सांस्कृतिक सचिव पद पर तस्वीर फिलहाल लगभग साफ हो गई है। उपाध्यक्ष पद पर विश्वजीत और सांस्कृतिक सचिव पद पर गौरव शर्मा ने ही अपना-अपना नामांकन दाखिल किया है। दोनों पदों पर एक-एक प्रत्याशी होने के कारण उनके निर्विरोध निर्वाचन की संभावना बनी हुई है और नामांकन पत्रों की जांच में पर्चे वैध पाए जाने तथा कोई आपत्ति या नाम वापसी नहीं होने की स्थिति में विश्वजीत का उपाध्यक्ष और गौरव शर्मा का सांस्कृतिक सचिव बनना तय माना जा रहा है।
हालांकि निर्विरोध निर्वाचन की आधिकारिक घोषणा चुनाव प्रक्रिया के तहत नामांकन पत्रों की जांच के बाद ही होगी। इसलिए फिलहाल दोनों पदों पर निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति को संभावित माना जा रहा है। नामांकन जांच के बाद ही कॉलेज प्रशासन की ओर से अंतिम स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
रुद्रपुर डिग्री कॉलेज में 29 सितंबर को मतदान होगा। मतदान को लेकर कॉलेज प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। वहीं पुलिस और प्रशासन भी छात्रसंघ चुनाव को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। चुनाव के दौरान कॉलेज परिसर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष नजर रखे जाने की तैयारी है, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति पैदा न हो।
छात्रसंघ चुनाव के अन्य पदों पर यदि मुकाबला कायम रहता है तो आने वाले दिनों में प्रचार अभियान और तेज होने की संभावना है। प्रत्याशी छात्र-छात्राओं के बीच पहुंचकर अपनी बात और अपने मुद्दे रखेंगे। ऐसे में चुनावी माहौल और अधिक गर्म होने की उम्मीद है।
दरअसल छात्रसंघ चुनाव केवल कॉलेज के पदाधिकारियों के चुनाव तक सीमित नहीं है। यही वह मंच है जहां से युवाओं में नेतृत्व क्षमता और लोकतांत्रिक चेतना विकसित होती है। इसलिए छात्र राजनीति को दलगत राजनीति, धनबल और अराजकता से दूर रखते हुए छात्रों की समस्याओं और उनके हितों को प्राथमिकता देने की जरूरत पर लगातार चर्चा होती रही है। छात्रसंघ के निर्वाचित प्रतिनिधियों से उम्मीद रहती है कि वे कॉलेज की वास्तविक समस्याओं को समझें और विद्यार्थियों की आवाज को प्रभावी ढंग से प्रशासन तक पहुंचाएं।
दूसरी ओर छात्र राजनीति में राजनीतिक दलों और उनके छात्र संगठनों के प्रभाव को लेकर भी बहस जारी है। एक पक्ष छात्र संगठनों को राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों से जुड़ने का माध्यम मानता है, जबकि दूसरी ओर यह सवाल भी उठता है कि कहीं छात्र राजनीति बाहरी राजनीतिक संरक्षण पर निर्भर होकर छात्रों के मूल मुद्दों से दूर तो नहीं हो रही। यही बहस इस चुनाव को लेकर भी महत्वपूर्ण है कि छात्रसंघ की राजनीति का केंद्र छात्र और उनके हित बनेंगे या चुनावी गतिविधियां व्यापक राजनीतिक प्रभाव की ओर बढ़ेंगी।
फिलहाल रुद्रपुर डिग्री कॉलेज में चुनावी माहौल चरम पर है। शहर बैनर-पोस्टरों से पटा है, गाड़ियों के काफिले दौड़ रहे हैं, छात्र समर्थकों में उत्साह है और कॉलेज प्रशासन के साथ पुलिस-प्रशासन भी चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए तैयार है। अब सबकी नजरें नामांकन पत्रों की जांच और उसके बाद होने वाली आधिकारिक घोषणा पर हैं।
29 सितंबर को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि चुनावी मुकाबले वाले पदों पर छात्रों का समर्थन किसे मिलता है, जबकि उपाध्यक्ष और सांस्कृतिक सचिव पद पर नामांकन जांच के बाद निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। ऐसे में रुद्रपुर डिग्री कॉलेज का यह छात्रसंघ चुनाव केवल चुनावी मुकाबले तक सीमित नहीं, बल्कि छात्र राजनीति की दिशा और उसके भविष्य को लेकर भी कई सवाल अपने साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।
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