गदर आंदोलन के शहीदों को समर्पित क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन का नौवां सम्मेलन शुरू, साम्राज्यवाद और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान

गदर आंदोलन के शहीदों को समर्पित क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन का नौवां सम्मेलन शुरू, साम्राज्यवाद और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान

समाचार इंडिया 1 | रुद्रपुर । क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन का नौवां सम्मेलन शनिवार, 31 अक्टूबर को रुद्रपुर के शिमला बहादुर स्थित अशोक विहार कॉलोनी के निकट गोविंद बैंक्वेट हॉल में शुरू हुआ। सम्मेलन के पहले दिन देश-दुनिया की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों पर गंभीर चर्चा हुई। सम्मेलन की शुरुआत प्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप से झंडा गीत गाकर की। संगठन के अध्यक्ष पीपी आर्य ने झंडारोहण किया, जिसके बाद देश और दुनिया में शोषण, उत्पीड़न तथा अन्याय के खिलाफ संघर्ष करते हुए शहीद हुए क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित कर मौन रखा गया।

संगठन का यह नौवां सम्मेलन भारत की आजादी के संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गदर आंदोलन के शहीदों को समर्पित है। इस दौरान वक्ताओं ने गदर आंदोलन के क्रांतिकारी योगदान को याद करते हुए मानवता को शोषण और उत्पीड़न से मुक्त कराने के संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।

अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर विचार रखते हुए संगठन के अध्यक्ष पीपी आर्य ने कहा कि पूरी दुनिया में साम्राज्यवादी देशों के बीच प्रभाव क्षेत्र और संसाधनों पर कब्जे की होड़ तेज हो रही है। अमेरिका और यूरोप के साम्राज्यवादी देश अपने कमजोर होते वर्चस्व को बचाने के लिए रूस और चीन के साथ प्रतिस्पर्धा और घेराबंदी की नीति अपना रहे हैं। इसके चलते दुनिया युद्ध और अस्थिरता की ओर बढ़ रही है। उन्होंने ईरान, यूक्रेन, फिलिस्तीन और लेबनान में जारी संघर्षों और तबाही का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परिस्थितियों का सबसे ज्यादा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने तीसरी दुनिया के देशों के शासक पूंजीपति वर्ग की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

राष्ट्रीय परिस्थितियों पर बात रखते हुए अजीत ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था भी संकट से गुजर रही है और सरकार की ओर से पेश की जा रही आर्थिक तस्वीर पर अर्थशास्त्रियों के बीच भी सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आर्थिक संकट का बोझ मेहनतकश जनता पर डाला जा रहा है। संकट से निपटने के नाम पर सरकार निरंकुश होती जा रही है तथा जनविरोधी कानूनों के माध्यम से जनता के जनवादी अधिकारों को सीमित किया जा रहा है। उन्होंने दलितों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों को भी गंभीर चिंता का विषय बताया।

वहीं सतीश ने कहा कि मजदूरों, किसानों, छात्रों और नौजवानों के अधिकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद देशभर में विभिन्न वर्ग अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के माध्यम से नागरिकता और मताधिकार को लेकर पैदा हो रही चिंताओं तथा पेपर लीक के विरोध में उभरे छात्र-युवा आंदोलनों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तमाम दमन के बावजूद युवाओं का संघर्ष अलग-अलग रूपों में जारी है।

सांगठनिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए भूपाल ने कहा कि वर्तमान समय में देश और दुनिया में जनता अपने अधिकारों तथा जनवादी व्यवस्था की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है। ऐसे दौर में एक जनवादी संगठन के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को और गंभीरता से समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह के क्रांतिकारी विचारों को आधार बनाकर जनता को संगठित करना समय की जरूरत है। इसके लिए संगठन को अपनी कमियों और खामियों को दूर करते हुए अधिक अनुशासित और मजबूत बनाना होगा।

सम्मेलन में टीआर पांडेय, मोहन मटियाली, रियासत, नासिर, राजेश, शक्ति सरकार, पदम और भारत सिंह सहित अन्य साथियों ने भी अपने विचार रखे। सम्मेलन के दौरान अंतरराष्ट्रीय साम्राज्यवाद, देश की आर्थिक परिस्थितियों, मजदूर-किसान आंदोलनों, युवाओं के सवालों और जनवादी अधिकारों की रक्षा जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठे।

संगठन की ओर से बताया गया कि सम्मेलन के दूसरे दिन 1 नवंबर को दोपहर 2 बजे से खुले सत्र का आयोजन किया जाएगा। इसमें मीडिया के साथियों के अलावा सभी जनपक्षधर लोगों, सामाजिक संगठनों और मजदूर संगठनों को आमंत्रित किया गया है।