किच्छा-सिरौली कलां नगर पालिका चुनाव, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मतगणना पर लगी रोक हटाई उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सभी को मतगणना के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की अधिसूचना का इंतजार है.

किच्छा-सिरौली कलां नगर पालिका चुनाव, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मतगणना पर लगी रोक हटाई


उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सभी को मतगणना के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की अधिसूचना का इंतजार है.

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने किच्छा और सिरौली कलां नगर पालिका में हुए चुनाव की मतगणना नहीं करने को लेकर राज्य चुनाव आयोग और सरकार के आदेश को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई की. मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति अलोक महरा की खंडपीठ ने राज्य सरकार व राज्य चुनाव आयोग के मतगणना न करने संबंधित आदेश पर रोक लगाते हुए कहा कि जब चुनाव हो गया है तो अब मतगणना पर क्यों रोक लगाई गयी है. इसलिए मतगणना शीघ्र प्रारम्भ की जाए.

दरअसल, आज 24 सितंबर को इस मामले में किच्छा निवासी अलीना मलिक ने बीते दिनों किच्छा और सिरौली कलां नगर पालिका के हुए चुनाव की मतगणना करने की मांग की थी. पिछली तारीख में हाईकोर्ट की एकलपीठ को राज्य चुनाव आयोग ने अवगत कराया था कि दोनों नगर पालिकाओं में 22 सितंबर को मतदान कराया जायेगा. इसको लेकर आयोग नें अधिसूचना जारी कर दी है, जबकि मतदान के बाद होने वाली मतगणना को अग्रिम आदेशों तक स्थगित रखा गया है.

चुनाव आयोग की अधिसूचना के बाद हाईकोर्ट एकलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर नियत की गई है. वहीं आज मतगणना को लेकर आयोग व राज्य सरकार के आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी गयी, जिसपर आज खंडपीठ ने आपना आदेश जारी किया और मतगणना कराने के लिए कहा.

मामले के अनुसार किच्छा निवासी नईमुल हुसैन सहित कई अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका सहित अन्य याचिकाएं दायर की थी. उन्होंने अपना याचिका ने कहा था कि सरकार ने प्रदेश की 43 नगर पालिकाओं के अध्यक्ष पदों के लिए प्रस्तावित आरक्षण की अधिसूचना जारी कर आम जनता से आपत्तियां मांगी थीं, लेकिन इसमें किच्छा नगर पालिका अध्यक्ष पद के आरक्षण का उल्लेख नहीं किया गया था.

याचिका में कहां गया था कि सरकार किच्छा में नगर पालिका चुनाव टालना चाहती है. याचिका में यह भी कहा गया कि आरक्षण आवंटन नियमावली के तहत अध्यक्ष पदों की कुल संख्या के आधार पर रोस्टर तैयार किया जाना चाहिए, जबकि सरकार ने 43 पालिका अध्यक्ष पदों के आधार पर ही रोस्टर तय किया.

याचिकाकर्ता के मुताबिक पूर्व में सरकार ने किच्छा नगर पालिका के कुछ वार्डों और गांवों को पालिका में शामिल किया था, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी. बाद में सरकार ने इन क्षेत्रों को दोबारा नगर पालिका में शामिल किया. इसके बाद चुनाव को लेकर विवाद सामने आया. कोर्ट के पूर्व आदेश के बाद किच्छा नगर पालिका के अध्यक्ष पद का आरक्षण भी तय कर दिया गया, लेकिन चुनाव नहीं कराया गया. याचिका में जल्द चुनाव कराने की मांग की गई है. यही नहीं सरकार नव गठित सरौली कलां नगर पालिका का चुनाव भी नहीं कराया, उसमे में चुनाव कराने की मांग की गयी है.