

मेट्रोपोलिस सिटी में प्रबंधन पर तानाशाही और पारदर्शिता की कमी के आरोप


रुद्रपुर स्थित मेट्रोपोलिस सिटी में सोसाइटी प्रबंधन को लेकर निवासियों और वर्तमान कार्यकारिणी के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। सोमवार को सोसाइटी के कई प्रबुद्ध निवासियों ने अध्यक्ष शंकर सिंह पटवाल से मुलाकात कर विभिन्न समस्याओं और व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। इस दौरान हुई वार्ता के बाद निवासियों ने प्रबंधन पर लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी और जवाबदेही से बचने के आरोप लगाए।
निवासियों के प्रतिनिधिमंडल में देवेंद्र शाही, डॉ. हरेंद्र मलिक, ए.के. शर्मा, बसंत पंत, प्रोफेसर खुल्लर, सुनील शुक्ला, डॉ. के. गुप्ता, विक्रांत फुटेला और बी.एल. चोमवाल सहित अन्य लोग शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने सोसाइटी के कार्यों में पारदर्शिता, नियमित आय-व्यय विवरण सार्वजनिक करने तथा आम सभा बुलाने की मांग रखी।
निवासियों का आरोप है कि अध्यक्ष ने बातचीत के दौरान कहा कि वे चुनाव जीतकर आए हैं और उन्हें 286 वोट मिले हैं, इसलिए वे हर सवाल का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हैं। इस बयान को लेकर निवासियों में नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि सोसाइटी में लोकतांत्रिक संवाद की जगह एकतरफा रवैया अपनाया जा रहा है।
बैठक में रिचार्ज कूपन वितरण व्यवस्था को लेकर भी मुद्दा उठा। निवासियों ने भीषण गर्मी को देखते हुए बुजुर्गों के लिए कार्यालय के अंदर व्यवस्था करने का अनुरोध किया, लेकिन प्रबंधन ने इसे समिति का निर्णय बताते हुए बदलाव से इंकार कर दिया।
इसके अलावा सोसाइटी फंड से कार्यालय के बाहर बाउंसर तैनात किए जाने पर भी सवाल उठाए गए। निवासियों ने कहा कि यदि किसी पदाधिकारी को व्यक्तिगत सुरक्षा की आवश्यकता है तो उसका खर्च निजी स्तर पर किया जाना चाहिए और सोसाइटी का पैसा सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ाने पर खर्च होना चाहिए।
मीटरों में कम लोड की तकनीकी समस्या, भवनों के अधूरे पेंट और मरम्मत कार्य तथा AGM बुलाने में हो रही देरी को लेकर भी निवासियों ने असंतोष जताया। उनका कहना है कि बरसात से पहले कार्य पूरे नहीं होने पर आर्थिक नुकसान सीधे निवासियों को उठाना पड़ेगा।
निवासियों ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर भी उनकी शिकायतों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई तो भविष्य में व्यापक स्तर पर विरोध किया जाएगा।
