

पश्चाताप या प्रचार? गुरुघर की सेवा पर उठे सियासी सवाल, सौरभ बेहड़ की मंशा पर बहस तेज।
रुद्रपुर -पूर्व मंत्री एवं किच्छा के विधायक तिलक राज बेहड़ के पुत्र और पार्षद सौरभ बेहड़ की गुरुघर में सेवा करते हुए सामने आई तस्वीरों ने उत्तराखंड की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह नहीं कि सेवा हो रही है या नहीं, सवाल यह है कि यह सेवा सच्चे पश्चाताप की भावना से की जा रही है या फिर योजनाबद्ध मीडिया ब्रांडिंग का हिस्सा बन चुकी है। सियासी गलियारों में इन तस्वीरों को साधारण नहीं माना जा रहा, क्योंकि सार्वजनिक जीवन में ऐसे दृश्य संदेश भी देते हैं और रणनीति भी गढ़ते हैं।
स्थानीय राजनीतिक हलकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि गुरुघर में सेवा करने वाले असंख्य लोग हैं, लेकिन किसी ने भी इसे सुर्खियां बटोरने का जरिया नहीं बनाया। इसके उलट सौरभ बेहड़ की गतिविधियों के साथ लगातार मीडिया कवरेज सामने आना संदेह पैदा कर रहा है। आलोचकों का दावा है कि सेवा को प्रचार में बदलने की यह कोशिश पहले भी देखी जा चुकी है, जब कथित तौर पर उन्होंने अपने ऊपर हमले की घटना को लेकर व्यापक सुर्खियां बटोरी थीं। उस प्रकरण के बाद पहली बार पूर्व मंत्री तिलक राज बेहड़ को सार्वजनिक रूप से भावुक होते देखा गया था, जिसने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया था।
इसी क्रम में विरोधी पक्ष यह भी आरोप लगा रहा है कि उक्त कथित हमले के बाद परिवार और नजदीकी रिश्तेदारों ने प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव बनाकर कार्रवाई करवाई, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठे। जिले के तत्कालीन पुलिस कप्तान मणिकांत मिश्रा सहित राजनीतिक प्रतिनिधियों पर दबाव के आरोप लगाए गए, हालांकि इन दावों पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बाद में आवास विकास चौकी में हुए हंगामे और कुछ नाबालिग बच्चों पर मुकदमे दर्ज होने का मामला भी चर्चा में रहा, जिसे आलोचक पूरी तरह गैरकानूनी करार दे रहे हैं और इसकी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। 
अब गुरुघर की सेवा से जुड़ी तस्वीरों के सामने आने के बाद वही सवाल फिर उठ खड़े हुए हैं कि क्या यह वास्तविक आत्ममंथन है या फिर छवि सुधार की नई पटकथा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सार्वजनिक जीवन में प्रतीकात्मक कदमों की अपनी अहमियत होती है, लेकिन जब वे बार-बार विवादों की पृष्ठभूमि में आएं तो उनकी मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल यह बहस तेज है और निगाहें इस पर टिकी हैं कि सौरभ बेहड़ इन आरोपों पर क्या स्पष्टता रखते हैं और क्या प्रशासन कथित घटनाओं की निष्पक्ष जांच कर भरोसा बहाल करेगा।


