

- ट्रांजिट कैंप में भाजपा के पार्षद, छूटभइये हिंदूवादी नेता और एक बड़े नेता की छत्रछाया में फिर फल-फूल रहा तितली गेम, नशा, वेश्यावृत्ति और कच्ची शराब का काला कारोबार — दूसरी ओर भाजपा के ही पार्षद की नशे के खिलाफ सक्रियता बनी जनहित की मिसाल
खबर :


महेंद्र मौर्य | समाचार इंडिया 1
रुद्रपुर
रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप क्षेत्र में सरकार और प्रशासन द्वारा बार-बार दोहराए जा रहे “जीरो टॉलरेंस” और “नशा मुक्ति” के दावे जमीनी हकीकत में खोखले साबित होते नजर आ रहे हैं। क्षेत्र में तितली गेम, सट्टा, नशा, कच्ची शराब और वेश्यावृत्ति जैसे अवैध कारोबार न सिर्फ बेरोकटोक जारी हैं, बल्कि कथित तौर पर भाजपा के एक पार्षद, एक छूटभइये हिंदूवादी नेता और एक बड़े स्थानीय नेता की छत्रछाया में और अधिक बेखौफ होकर फल-फूल रहे हैं।
हालात इतने चिंताजनक हैं कि आरोप है—संरक्षण देने वाले पार्षद की एक “शह ” के बाद ही यह काला कारोबार फिर पूरी रफ्तार पकड़ लेता है। इससे यह सवाल और गहराता जा रहा है कि क्या ट्रांजिट कैंप में कानून से बड़ा किसी नेता का रसूख है?
बीती रात वार्ड नंबर-2 की कृष्णा कॉलोनी में सामने आई घटना ने पूरे तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया। स्थानीय लोगों ने अपने पार्षद को सूचना दी कि इलाके में खुलेआम सट्टा-जुआ, अवैध शराब और तितली गेम खिलाया जा रहा है। सूचना मिलते ही वार्ड-2 के पार्षद मौके पर पहुंचे। उनकी मौजूदगी से घबराकर सट्टेबाज मौके से फरार हो गए। लेकिन लौटते समय उन्हीं अवैध कारोबारियों और उनके सहयोगियों ने पार्षद को गालियां देकर खुलेआम दबाव बनाने और डराने की कोशिश की।
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि पार्षद द्वारा पुलिस को सूचना देने से पहले ही भाजपा के ही एक अन्य पार्षद और ट्रांजिट कैंप के एक कथित बड़े नेता के फोन आने शुरू हो गए। आरोप है कि इन कॉल्स के जरिए पूरे मामले को रफा-दफा करने और कार्रवाई रोकने का दबाव बनाया गया। यही नहीं, जिन पार्षद पर संरक्षण के आरोप हैं, उनके खिलाफ पहले भी तितली गेम, सट्टा कारोबार और महिला उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं और वे कई बार जेल की सलाखों के पीछे भी जा चुके हैं।
दबाव के बावजूद वार्ड-2 के पार्षद पीछे नहीं हटे। वे दोबारा मौके पर पहुंचे, जहां गाली-गलौज करने वाले सट्टेबाज अपनी मोटरसाइकिल छोड़कर फरार हो गए। पुलिस ने मोटरसाइकिल को जब्त कर थाने ले जाकर जांच शुरू की। इसके बाद जब पार्षद पुलिस के साथ फिर मौके पर पहुंचे, तो आरोपी पुलिस और जनप्रतिनिधि को देखकर दोबारा भाग खड़े हुए। यह साफ संकेत है कि अवैध कारोबारियों को किसी न किसी स्तर पर मजबूत राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसी संरक्षण के चलते ट्रांजिट कैंप क्षेत्र में नशा, सट्टा, कच्ची शराब और वेश्यावृत्ति का पूरा नेटवर्क खड़ा हो चुका है। इसके दुष्परिणाम भी सामने आ रहे हैं—घरेलू हिंसा, गृह क्लेश, नशे से मौतें और आए दिन झगड़े अब आम बात हो चुकी है। पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बार-बार शिकायतों और तथ्यों के बावजूद सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही।
इस पूरे घटनाक्रम में वार्ड नंबर-2 के पार्षद की भूमिका उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है। पहले भी उनके नेतृत्व में कई नशा कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है और इस बार भी उन्होंने साफ संदेश दिया है कि जनप्रतिनिधि का धर्म अवैध कारोबारियों को संरक्षण देना नहीं, बल्कि जनता को नशे के जाल से बाहर निकालना है।
वहीं दूसरी ओर, संरक्षण देने वाले पार्षद और उनके समर्थक न केवल कानून और प्रशासन की साख को चोट पहुंचा रहे हैं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी की नशा मुक्ति और जीरो टॉलरेंस की नीति को भी कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।
अब असली परीक्षा सत्ता और प्रशासन की है। यदि ऐसे कथित संरक्षकों पर निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ हो जाएगा कि ट्रांजिट कैंप में कानून से बड़ा “संरक्षण” चलता है।
हालांकि, वार्ड-2 के पार्षद की सक्रियता ने यह जरूर साबित कर दिया है कि अगर जनप्रतिनिधि ठान ले, तो दबाव, धमकी और माफिया तंत्र के बावजूद जनहित की लड़ाई लड़ी जा सकती है।
