डल बाबा मंदिर में राजा जगत देव महाराज की प्रतिमा गायब: बक्सा समाज की आस्था, इतिहास और राजनीति के बीच उलझा गंभीर मामला। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अरविंद यादव ने लिया संज्ञान।

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डल बाबा मंदिर में राजा जगत देव महाराज की प्रतिमा गायब: बक्सा समाज की आस्था, इतिहास और राजनीति के बीच उलझा गंभीर मामला। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अरविंद यादव ने लिया संज्ञान।


विधानसभा गदरपुर क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक और आस्था के प्रमुख केंद्र डल बाबा मंदिर में राजा जगत देव महाराज की प्रतिमा के अचानक गायब होने का मामला अब पूरे क्षेत्र में गहरी चिंता, आक्रोश और राजनीतिक हलचल का कारण बन गया है। आज मंदिर परिसर में दर्शन के दौरान यह गंभीर तथ्य सामने आया कि पूर्व में क्षेत्रीय विधायक द्वारा स्थापित कराई गई राजा जगत देव महाराज की प्रतिमा अब मंदिर में मौजूद नहीं है।

उल्लेखनीय है कि जब यह प्रतिमा मंदिर परिसर में स्थापित की गई थी, तब इसे लेकर क्षेत्रवासियों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया था। ढोल-नगाड़ों, धार्मिक अनुष्ठानों और विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा के साथ राजा जगत देव महाराज की प्रतिमा की स्थापना की गई थी। बक्सा समाज सहित आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के लिए यह प्रतिमा केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि उनके इतिहास, सम्मान और पहचान का प्रतीक थी। ऐसे में इस प्रतिमा का रहस्यमय ढंग से गायब हो जाना सीधे तौर पर समाज की आस्था पर आघात माना जा रहा है।

जब इस संबंध में मंदिर के पुजारी से बातचीत की गई, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि प्रतिमा कब, कैसे और किसके द्वारा हटाई गई। यह स्थिति और भी अधिक चौंकाने वाली है, क्योंकि इतनी महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक घटना के बावजूद अब तक न तो कोई आधिकारिक जानकारी सामने आई है और न ही क्षेत्रीय विधायक या प्रशासन की ओर से कोई संतोषजनक बयान दिया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं और जनता को जवाब देने से बच रहे हैं।

इस प्रकरण में एक और गंभीर आरोप यह सामने आया है कि राजा जगत देव महाराज की पुरानी प्रतिमा को नियमों और धार्मिक परंपराओं के विरुद्ध डाम में डाल दिया गया। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार किसी भी प्रतिमा का विसर्जन सदैव बहते हुए पवित्र जल में किया जाता है। डाम में प्रतिमा डालना न केवल धार्मिक नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है, बल्कि इसे राजा जगत देव महाराज और बक्सा समाज के अपमान के रूप में भी देखा जा रहा है। इस कथित कृत्य से समाज में गहरा रोष व्याप्त है।

मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासन की ओर से डल बाबा मंदिर परिसर में एक नई अष्टधातु की प्रतिमा स्थापित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, इस कदम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बक्सा समाज का कहना है कि बिना समाज से संवाद किए, बिना पुराने घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाए और बिना गायब प्रतिमा की बरामदगी के नई प्रतिमा की स्थापना करना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि मामले को दबाने का प्रयास प्रतीत होता है। समाज यह जानना चाहता है कि मूल प्रतिमा कहां गई, उसे हटाने का निर्णय किसने लिया और इसके पीछे क्या कारण रहे।

राजा जगत देव महाराज का इतिहास केवल गदरपुर या बाजपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका प्रभाव और आस्था पूरे तराई क्षेत्र, उत्तराखंड और देश के विभिन्न हिस्सों में फैले बक्सा समाज से गहराई से जुड़ा हुआ है। राजा जगत देव महाराज को बक्सा समाज अपने आराध्य, संरक्षक और ऐतिहासिक नायक के रूप में मानता है। डल बाबा मंदिर वर्षों से इस आस्था का केंद्र रहा है, जहां बाजपुर, गदरपुर सहित पूरे तराई क्षेत्र से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर से प्रतिमा का गायब होना केवल एक स्थानीय घटना नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व का विषय बन गया है।

इस पूरे प्रकरण में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अरविंद यादव की भूमिका और गंभीरता भी चर्चा में है। अरविंद यादव ने शुरू से ही इस मामले को गंभीरता से उठाया और बक्सा समाज की भावनाओं के साथ खड़े होकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यह केवल मूर्ति हटाने का मामला नहीं है, बल्कि यह समाज के इतिहास और सम्मान से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए, गायब प्रतिमा को शीघ्र बरामद किया जाए और यदि किसी भी स्तर पर धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ हुआ है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

डल बाबा मंदिर में राजा जगत देव महाराज की प्रतिमा को लेकर चल रही यह राजनीति, प्रशासनिक निर्णय और चुप्पी अब बक्सा समाज के लिए असहनीय होती जा रही है। समाज का स्पष्ट कहना है कि जब तक सच्चाई सामने नहीं आती और मूल प्रतिमा के साथ न्याय नहीं होता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। बहुत जल्द इस विषय को लेकर प्रशासन से औपचारिक मुलाकात कर ठोस कार्रवाई की मांग की जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान क्षेत्र पंचायत सदस्य अमित कुमार और अन्य सामाजिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी रही, जिन्होंने एक स्वर में कहा कि आस्था, इतिहास और समाज के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। डल बाबा मंदिर और राजा जगत देव महाराज से जुड़ा यह मामला अब केवल एक खबर नहीं, बल्कि पूरे तराई क्षेत्र में सामाजिक चेतना और अधिकारों की आवाज बनता जा रहा है।