ऑपरेशन सिंद्धूर के बाद एक लेख जिसने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के खिलाफ पूरे विश्व में आईना दिखा दिया था। यह लेख किसी भारतीय समाचार पत्र में नहीं बल्कि अमेरिका के एक अखबार The Hill में प्रकाशित होता है। इस लेख के अनुसार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी की तुलना आतंकवाद से की गई थी। जो कि सच भी है। इसके बाद शुरू होती है वो कहानी जिसने एक भारतीय पत्रकार को परेशान तो किया ही लेकिन कहीं ना कहीं यह भारतीय पत्रकार ट्रोल भी हो गया। उसके बाद पाकिस्तान से उसको धमकियां मिलने का सिलसिला शुरू हुआ। फिर भी यह भारतीय पत्रकार किसी से डरा नहीं हालांकि तब तक केंद्रीय गृह मंत्रालय हरकत में आ चुका था। इसी बीच पाकिस्तान हाईकमीश्न चणाक्यपुरी से इस पत्रकार के नाम नोटिस आ जाता है। फिर हरकत में आता है विदश मंत्रालय शायद किसी को पता भी नहीं होगा इस पत्रकार को विदेश मंत्रालय में 15 दिन तक रखा गया। अभी यह पत्रकार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के समाचार पत्र में कार्यरत है। हम सुरक्षा की दृष्टि से इस पत्रकार का नाम नहीं बता रहे हैं लेकिन एक इतिहास रहेगा कि एक पत्रकार जो दिन में मुजफ्फरनगर में नोकरी करता था और शाम को Y+ की सुरक्षा में उसे दिल्ली पहुंचाया जाता था जहां विदेश मंत्रालय में उसे रखा गया था, फिलहाल अगर विदेश मंत्रालय के सूत्रों की मांनें तो इस पत्रकार को जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर किसा सम्मान से नवाजा जा सकता है।
