_डाबर कंपनी में हादसा: काम के दौरान युवती की उंगली कटी, छात्रसंघ और हरीश पनेरू ने किया हंगामा_

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_डाबर कंपनी में हादसा: काम के दौरान युवती की उंगली कटी, छात्रसंघ और हरीश पनेरू ने किया हंगामा_

रुद्रपुर (उधमसिंह नगर): रुद्रपुर की प्रसिद्ध डाबर इंडिया लिमिटेड कंपनी में शनिवार को काम के दौरान एक युवती की उंगली कट जाने से हड़कंप मच गया। घटना के बाद घायल युवती को तत्काल अस्पताल भेजा गया, लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन की कथित लापरवाही के विरोध में छात्रसंघ के नेता हरीश पनेरू और उनके साथियों ने कंपनी के मुख्य गेट पर जमकर हंगामा किया।

 

सूत्रों के अनुसार, युवती कंपनी के पैकेजिंग सेक्शन में कार्यरत थी। बताया जा रहा है कि मशीन में तकनीकी खराबी आने के बावजूद उसे बंद नहीं किया गया। इसी दौरान युवती का हाथ फँस गया और उसकी एक उंगली कट गई। कर्मचारियों ने तत्काल मशीन बंद कर उसे नजदीकी अस्पताल पहुँचाया।

 

घटना के बाद कर्मचारियों में आक्रोश फैल गया। छात्र नेता हरीश पनेरू और छात्रसंघ के अन्य सदस्यों ने मौके पर पहुँचकर डाबर प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कंपनी में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है और कामगारों की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक उदासीनता बनी हुई है।

 

हरीश पनेरू के नेतृत्व में छात्रसंघ ने कंपनी गेट पर धरना-प्रदर्शन किया। उन्होंने नारेबाजी करते हुए मांग की कि — घायल युवती को उचित मुआवजा दिया जाए, घटना की निष्पक्ष जाँच हो, फैक्ट्री में सभी सुरक्षा मानक लागू किए जाएँ। प्रदर्शन के दौरान मौके पर पुलिस भी पहुँची और वार्ता के बाद छात्रों को शांत कराया गया।

 

कानूनी दृष्टिकोण से क्या है मामला

भारतीय कानून के अनुसार — फैक्ट्री अधिनियम 1948 के तहत नियोक्ता पर यह दायित्व होता है कि वह कर्मचारियों को सुरक्षित कार्य वातावरण प्रदान करे। यदि किसी कर्मचारी को काम के दौरान अंगभंग या स्थायी चोट होती है, तो यह व्यावसायिक दुर्घटना मानी जाती है। ऐसी स्थिति में कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 के तहत पीड़ित को मुआवजे का अधिकार होता है। दोष सिद्ध होने पर कंपनी या प्रबंधन पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

 

अंग कटने पर चिकित्सा और कानूनी प्रक्रिया

यदि उंगली पूरी तरह से कट गई हो तो इसे “अंग भंग” माना जाता है। इस स्थिति में डॉक्टर द्वारा डिसएबिलिटी सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। श्रम विभाग में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है। इसके आधार पर कंपनी को मुआवजा देना अनिवार्य होता है।

 

प्रशासन क्या कर सकता है

स्थानीय प्रशासन और श्रम विभाग इस प्रकरण में संज्ञान लेकर — कंपनी की मशीनरी और सुरक्षा प्रोटोकॉल की जाँच, कर्मचारियों के कार्य घंटे और सुरक्षा उपकरणों की समीक्षा, तथा दोषियों पर कार्यवाही के आदेश दे सकते हैं।

 

छात्र नेताओं की भूमिका

हरीश पनेरू और छात्रसंघ ने कहा कि वे पीड़ित युवती को न्याय दिलाने तक आंदोलन जारी रखेंगे। उन्होंने जिला प्रशासन से माँग की कि महिला श्रमिकों के साथ हो रहे शोषण और सुरक्षा उल्लंघनों की जाँच कर दोषियों पर सख्त कार्यवाही की जाए।