हरीश रावत बनाम गोकुल मेहरा: 20 लाख की कथित डिमांड, तमंचा दिखाकर धमकी और अधूरे मकान का विवाद—हल्द्वानी से खटीमा तक निर्माण साझेदारी बनी कानूनी जंग।

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हरीश रावत बनाम गोकुल मेहरा: 20 लाख की कथित डिमांड, तमंचा दिखाकर धमकी और अधूरे मकान का विवाद—हल्द्वानी से खटीमा तक निर्माण साझेदारी बनी कानूनी जंग।


रुद्रपुर -उत्तराखंड के हल्द्वानी और खटीमा के बीच एक निर्माण कार्य को लेकर शुरू हुआ व्यावसायिक विवाद अब खुली कानूनी जंग में बदल गया है। एक ओर खुद को “पहाड़ी आर्मी उत्तराखंड” का संस्थापक अध्यक्ष बताने वाले हरीश रावत हैं, तो दूसरी ओर निर्माण कारोबारी गोकुल मेहरा। दोनों एक-दूसरे पर गंभीर आर्थिक और आपराधिक आरोप लगाते हुए प्रशासन और पुलिस के दरवाजे पर पहुँच चुके हैं।

गोकुल मेहरा का आरोप है कि उन्हें 20 लाख रुपये की कथित अवैध मांग के लिए दबाव में लिया गया। उनका कहना है कि बाजार दर से कम रेट पर मकान निर्माण का काम करने के बाद जब उन्होंने गुणवत्ता से समझौता करने से इनकार किया तो मानसिक प्रताड़ना शुरू हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जान से मारने की धमकी दी गई, “हल्द्वानी में काम नहीं करने देने” की चेतावनी दी गई और संगठन के माध्यम से उन पर दबाव बनाया गया। मेहरा का यह भी दावा है कि मुखानी थाना में शिकायत का दबाव बनाकर उनसे एक लाख रुपये जबरन ट्रांसफर कराए गए। उन्होंने गाड़ी से टक्कर मारने की कोशिश, कर्मचारियों को बहकाकर वीडियो बनाने और ग्राहकों के बीच छवि खराब करने जैसे आरोप भी लगाए हैं।

यह शिकायत उधम सिंह नगर के जिलाधिकारी और नैनीताल प्रशासन तक पहुंचाई गई है। भारतीय किसान यूनियन (प्रधान) उत्तराखंड के प्रदेश संगठन महासचिव मुकेश सिंह बिष्ट ने भी मामले को प्रशासनिक स्तर पर उठाया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

दूसरी ओर, हरीश रावत ने 27 दिसंबर 2025 को मुखानी थाने में दी गई तहरीर में दावा किया है कि जब वे लामाचौर क्षेत्र में निर्माण कार्य देखने गए तो दो युवकों—नवीन जोशी और गुरप्रीत—ने तमंचा दिखाकर उन्हें धमकाया और धक्का-मुक्की की। उन्होंने आरोप लगाया कि इन युवकों ने छह गोली मारने की धमकी दी और खुद को खटीमा का बड़ा बदमाश बताया। रावत का कहना है कि बाद में उन्हें जानकारी मिली कि ये युवक गोकुल मेहरा से जुड़े हुए हैं।

हरीश रावत ने यह भी आरोप लगाया है कि गोकुल मेहरा उनके 20 लाख रुपये के मुनाफे और 8 लाख रुपये के मकान निर्माण भुगतान के साथ गायब हैं और कॉल रिसीव नहीं कर रहे। उन्होंने इन कथित अराजक तत्वों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरोह का खुलासा करने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

विवाद का तीसरा पहलू निर्माण लागत को लेकर सामने आया है। एक प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि मकान की वास्तविक लागत लगभग 15 लाख रुपये थी, जबकि 25 लाख रुपये तक का भुगतान किया जा चुका है और मकान अधूरा छोड़ दिया गया। अब दोनों पक्षों के बीच स्वतंत्र इंजीनियर से लागत का पुनर्मूल्यांकन कराने का प्रस्ताव भी सामने आया है, ताकि भुगतान और निर्माण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

मामला अब दोनों जनपदों के प्रशासन और पुलिस के संज्ञान में है। अधिकारियों के अनुसार, प्राप्त तहरीरों के आधार पर प्रारंभिक जांच की जा रही है और सभी आरोपों की सत्यता परखने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। यदि हथियार दिखाने, जबरन वसूली, धमकी या आर्थिक धोखाधड़ी के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाते हैं तो संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

निजी साझेदारी से शुरू हुआ यह निर्माण विवाद अब आर्थिक टकराव, आपराधिक आरोपों और संगठनात्मक दबाव के सवालों में उलझ गया है। फिलहाल हरीश रावत और गोकुल मेहरा दोनों खुद को पीड़ित बताते हुए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहे हैं। अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष पर टिकी हैं।