

पत्रकारों की एसपी से सीधी मुलाकात के बाद प्रशासन हरकत में, वरिष्ठ पत्रकार रूपेश कुमार सिंह पर सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणी करने वालों पर सख्त कार्रवाई का स्पष्ट आश्वासन, युवा पत्रकार हिमांशु ठाकुर पर हुए मुकदमे में भी मिलेगी राहत।


रुद्रपुर, ऊधम सिंह नगर।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हो रहे हमलों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सच लिखना अब अपराध बनता जा रहा है। सोशल मीडिया के खुले मंच पर वरिष्ठ पत्रकार को दी जा रही गालियाँ और जान से मारने की धमकियाँ न केवल पत्रकारिता पर हमला हैं, बल्कि संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को भी सीधी चुनौती हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला वरिष्ठ पत्रकार एवं मासिक पत्रिका प्रेरणा अंशु व अनसुनी आवाज़ के संपादक रुपेश कुमार सिंह के साथ सामने आया है, जिन्हें बीते करीब 45 दिनों से फेसबुक पर लगातार अपशब्द, अश्लील टिप्पणियाँ और धमकियाँ दी जा रही हैं।
आरोप है कि यह पूरी गतिविधि सुनियोजित ढंग से की जा रही है, ताकि एक निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकार को डराकर उसकी आवाज़ को दबाया जा सके। रुपेश कुमार सिंह पिछले 24 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और सत्ता, सिस्टम तथा सामाजिक अन्याय के खिलाफ सवाल उठाना उनकी पहचान रही है। उनकी यही बेबाक कलम अब कुछ अराजक मानसिकता रखने वालों को असहज कर रही है, जिसके चलते सोशल मीडिया को हथियार बनाकर उन्हें “सबक सिखाने” और “खामियाजा भुगतने” जैसी भाषा का खुलेआम इस्तेमाल किया गया।
यह मामला केवल एक पत्रकार को निशाना बनाए जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस सोच को उजागर करता है जो सवालों से घबराती है और जवाब देने के बजाय धमकी का सहारा लेती है। सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से की गई ये टिप्पणियाँ न सिर्फ आपत्तिजनक और अशोभनीय हैं, बल्कि कानून, संविधान और प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला भी हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पत्रकार जगत में गहरा रोष व्याप्त हो गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले के पत्रकार एकजुट हुए और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, ऊधम सिंह नगर से सीधी मुलाकात कर पूरे प्रकरण से अवगत कराया। पत्रकारों ने साफ शब्दों में कहा कि यदि सच लिखने वाले पत्रकारों को इसी तरह डराया जाता रहा, तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत होगा। उन्होंने दोषियों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि सोशल मीडिया की आड़ में चल रही इस गुंडागर्दी पर अब विराम लगना चाहिए।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने पत्रकारों की बात को गंभीरता से सुना और पूरे मामले में निष्पक्ष जांच करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का स्पष्ट आश्वासन दिया। एसपी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी और सोशल मीडिया के माध्यम से धमकी देने वालों पर भी कानून पूरी सख्ती से लागू किया जाएगा।
पत्रकारों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे अराजक तत्वों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो सोशल मीडिया की यह प्रवृत्ति एक खतरनाक परंपरा बन सकती है, जिसका खामियाजा पूरे समाज को भुगतना पड़ेगा। पत्रकारों ने दो टूक शब्दों में कहा कि कलम को गाली और धमकी से रोका नहीं जा सकता। इतिहास गवाह है कि जब-जब सच को दबाने की कोशिश की गई, तब-तब आवाज़ और अधिक बुलंद होकर सामने आई है।
यह लड़ाई सिर्फ वरिष्ठ पत्रकार रुपेश कुमार सिंह की नहीं है, बल्कि हर उस पत्रकार और हर उस नागरिक की है जो सच के पक्ष में खड़ा है। अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के साथ मजबूती से खड़ा होता है या फिर सोशल मीडिया की अराजकता को मौन समर्थन मिलता है। एक बात साफ है—कलम झुकेगी नहीं, और सच लिखने की कीमत डर नहीं हो सकती। वही काशीपुर में हुए युवा पत्रकार हिमांशु ठाकुर पर मुकदमे में भी एसएसपी ने आश्वासन दिया है कि पत्रकारों की अपील पर राहत दी जाएगी।
