

*ध्वस्तीकरण के नाम पर तपोस्थली उजाड़ी गई, साधु का सामान गायब, बिजली काटी गई… अब जान पर संकट❞


रुद्रपुर में सनकादिक तपोस्थली प्रकरण ने लिया गंभीर मोड़, प्रशासनिक भूमिका पर खड़े हुए तीखे सवाल*
रुद्रपुर (उधम सिंह नगर)।
राजस्व ग्राम रुद्रपुर के खसरा नंबर 66 स्थित सनकादिक तपोस्थली एवं राधा कुंड से जुड़ा मामला अब केवल अतिक्रमण या ध्वस्तीकरण की प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह धार्मिक आस्था, मानवीय संवेदनाओं और कानून-व्यवस्था से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर और चिंताजनक प्रकरण बनता जा रहा है।
तपोस्थली के महंत राम बालक दास ने जिलाधिकारी उधम सिंह नगर को दिए अपने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि 10 जनवरी 2026 को किए गए पक्के निर्माण के ध्वस्तीकरण के दौरान उनका कीमती और धार्मिक महत्व का सामान गायब कर दिया गया, जो आज तक उन्हें वापस नहीं मिला है। महंत का कहना है कि इस संबंध में उन्होंने पहले भी प्रशासन को अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।
महंत राम बालक दास के अनुसार, ध्वस्तीकरण के बाद से उनका बिजली मीटर, लकड़ी का बड़ा सन्दूक, अलमारी, लगभग पच्चीस हजार रुपये की नगद राशि, पूजा-पाठ से जुड़े बर्तन, बिजली के औजार, आवश्यक कागजात, कुर्सियाँ, बेंच, पटरे और धार्मिक मूर्तियाँ गायब हैं। उनका आरोप है कि यह केवल सामान का नुकसान नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से तपोस्थली को उजाड़ने का प्रयास है।
मामले को और अधिक संवेदनशील बनाता है बिजली विभाग की अनुमति के बिना विद्युत कनेक्शन काटे जाने का आरोप। महंत का कहना है कि इस कार्रवाई के कारण वे कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं और न तो पूजा-पाठ सुचारू रूप से कर पा रहे हैं, न ही गौवंश की उचित सेवा संभव हो पा रही है।
महंत राम बालक दास बताते हैं कि इसी तपोस्थली परिसर में वे वर्षों से लगभग पच्चीस गौमाताओं की सेवा अपने निजी खर्च पर करते आ रहे हैं। यहां ब्रह्मदेव की गोद में प्राकृतिक हनुमान जी, राधा-कृष्ण और गोपेश्वर महादेव की मूर्तियाँ विराजमान हैं। ऐसे में ध्वस्तीकरण के बाद सामान का गायब होना केवल चोरी का मामला नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और सनातन परंपरा पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।
महंत ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि प्रशासन की ओर से उन्हें आश्वासन दिया गया था कि खसरा नंबर 66 पर बने अवैध निर्माणों को हटाया जाएगा और विकास शर्मा पुत्र चाँद किशन को तपोस्थली क्षेत्र में आने से पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि न तो प्रतिबंध प्रभावी दिखाई देता है और न ही किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई अब तक होती दिख रही है।
मामले का सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलू तब सामने आता है जब महंत राम बालक दास अपने पत्र में जान के खतरे की आशंका जताते हैं। उनका कहना है कि उन्हें डर है कि संबंधित व्यक्ति या उसके करीबी लोग किसी दुर्घटना के बहाने उनकी हत्या भी करवा सकते हैं। उन्होंने प्रशासन से अपनी जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है।
अब इस पूरे मामले ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं जिनके जवाब प्रशासन को देने होंगे। ध्वस्तीकरण के बाद गायब हुए सामान की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। बिना वैधानिक अनुमति बिजली कनेक्शन क्यों काटा गया। धार्मिक स्थल और गौशाला से जुड़े मामले में इतनी असंवेदनशीलता क्यों बरती गई। और जब जान का खतरा लिखित रूप में बताया गया, तो सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
यह प्रकरण अब केवल एक साधु की व्यक्तिगत पीड़ा नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, धार्मिक स्वतंत्रता और कानून के राज की साख से जुड़ा हुआ सवाल बन चुका है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस प्रार्थना पत्र को फाइलों में दबाकर चुप्पी साध लेता है या निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई कर यह साबित करता है कि कानून वास्तव में सबके लिए समान है।

