*“सुना नहीं गया किसान का दर्द” — चार करोड़ की ठगी और पुलिस उत्पीड़न का सनसनीखेज मामला।*

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“सुना नहीं गया किसान का दर्द” — चार करोड़ की ठगी और पुलिस उत्पीड़न का सनसनीखेज मामला।

रिपोर्ट – महेंद्र पाल मौर्य “समाचार इंडिया 1” काशीपुर, ऊधम सिंह नगर से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां किसान सुखवंत सिंह, निवासी काशीपुर, उत्तराखंड ने कई लोगों और पुलिस अधिकारियों पर चार करोड़ रुपये की ठगी, मिलीभगत और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित किसान का कहना है कि काशीपुर के अमरजीत सिंह, दिव्या, रवीन्द्र कौर, लवप्रीत कौर, कुलविंदर सिंह, हरदीप कौर, आशीष कुमार चौहान व उसकी पत्नी, अमित, गिरवर सिंह, गीतांजलि, मोहित, विमल कुमार व उसकी पत्नी, महिपाल सिंह, शिवेन्द्र, पूजा, देवेंद्र, राजेंद्र, गुरुप्रेम सिंह, जगपाल सिंह, जगवीर राय, मनप्रीत कलसी, जहीर, सुखवंत सिंह पन्नू, वीरपाल सिंह पन्नू, बलवंत सिंह समेत अन्य लोगों ने आपसी साजिश के तहत उनके साथ लगभग चार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।

पीड़ित का आरोप है कि जब वह इस गंभीर आर्थिक अपराध की शिकायत लेकर थाना आईटीआई काशीपुर पहुंचे, तो तत्कालीन थाना प्रभारी कुंदन सिंह रौतेला और उपनिरीक्षक प्रकाश सिंह बिष्ट ने कोई कार्रवाई करने के बजाय उन्हें और उनके परिवार को घंटों थाने में बैठाए रखा, गाली-गलौज की और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। किसान का कहना है कि न्याय दिलाने की बजाय पुलिस ने उसे ही अपराधी की तरह ट्रीट किया।

इसके बाद जब पीड़ित परिवार ने ऊधम सिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा से शिकायत की, तो वहां भी कार्रवाई की उम्मीद पूरी नहीं हुई। आरोप है कि SSP कार्यालय में भी उनकी बात नहीं सुनी गई और उल्टा उन्हें अपमानित और प्रताड़ित किया गया। न्याय की तलाश में पीड़ित जब पैगा चौकी पहुंचे तो वहां लगभग एक महीने तक उन्हें दिन में दो से तीन बार बुलाया गया, घंटों बैठाया गया, लेकिन न तो एफआईआर दर्ज हुई और न ही किसी आरोपी पर कोई ठोस कार्रवाई की गई।

किसान सुखवंत सिंह ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि थाना आईटीआई, चौकी और संबंधित पुलिस अधिकारियों ने आरोपियों से लगभग 30 लाख रुपये लेकर पूरे मामले को दबा दिया। इतना ही नहीं, पीड़ित का दावा है कि 4 फरवरी 2025 को थाना प्रभारी कुंदन सिंह रौतेला ने उनसे स्वयं पांच लाख रुपये लिए, इसके बावजूद भी कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।

पीड़ित किसान का कहना है कि लगातार आर्थिक नुकसान, न्याय न मिलना, पुलिस द्वारा बार-बार किया गया उत्पीड़न और धमकियों के कारण वह, उनकी पत्नी और 13 वर्षीय बेटा मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन परिस्थितियों ने उन्हें आत्मघाती कदम उठाने तक के लिए मजबूर कर दिया, जिसके लिए उन्होंने आरोपियों के साथ-साथ संबंधित पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है।

यह मामला अब केवल एक धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और कथित भ्रष्टाचार पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। पीड़ित ने राज्य सरकार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तराखंड पुलिस, विजिलेंस विभाग, प्रवर्तन निदेशालय, STF और CBI से निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि पूरे प्रकरण की निगरानी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों में कराई जाए ताकि एक किसान परिवार को न्याय मिल सके।

अब यह देखना अहम होगा कि सरकार और जांच एजेंसियां इस गंभीर आरोपों वाले मामले में क्या कदम उठाती हैं और क्या पीड़ित किसान को वास्तव में न्याय मिल पाता है या नहीं।