कौन बनेगा उधम सिंह नगर जिले का जिला पंचायत अध्यक्ष। क्या वास्तव में मजबूत गंगवार परिवार। तो फिर,तराई की राजनीति तय करेगी कुमाऊं ,गढ़वाल से गुजर के राजधानी देहरादून की कुर्सी का सरताज। क्या वास्तव में विधानसभा 2027 के लिए सेमी फाइनल साबित होगा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव । बड़ा सवाल,

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कौन बनेगा उधम सिंह नगर जिले का जिला पंचायत अध्यक्ष ? क्या वास्तव में मजबूत गंगवार परिवार ? तो फिर,तराई की राजनीति तय करेगी कुमाऊं ,गढ़वाल से गुजर के राजधानी देहरादून की कुर्सी का सरताज। क्या वास्तव में विधानसभा 2027 के लिए सेमी फाइनल साबित होगा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव । बड़ा सवाल,       रिपोर्ट – महेंद्र पाल मौर्य। “समाचार इंडिया 1” रुद्रपुर – त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के अंतिम दौर में चल रही राजनीतिक उठा- पठक बहुत कुछ तय करने वाली है। खासकर उधम सिंह नगर , तराई के प्रमुख जिले की राजनीति, तराई, कुमाऊं से लेकर गढ़वाल तक की राजनीति को प्रभावित करेगी । क्योंकि तराई के नेताओं के तार सीधे कुमाऊं और गढ़वाल से जुड़े रहते हैं और राज्य को बड़ी मात्रा में राजस्व तराई से ही प्राप्त होता है , इस लिहाज से तराई पर अपना वर्चस्व सभी नेता कायम रखना चाहते हैं। शायद इसीलिए कुमाऊं और गढ़वाल के कई नेताओं ने तराई में अपना गढ़ बनाकर डेरा डाल रखा रखा है।  वहीं लगातार रिकॉर्ड जीत हासिल कर दोबारा सत्ता में आई भाजपा के लिए नई मुश्किलें खड़ी हो सकती है।  क्योंकि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के इस अंतिम दौर में उधम सिंह नगर जिले के जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख जीत , नेताओं की राजनीति की दिशा और दशा भी तय कर देगी । खासकर उधम सिंह नगर जिले की जिला पंचायत सीट जिस पर की बरा के गंगवार परिवार का दबदबा रहा है। “गंगवार परिवार”,  अब तराई के कुछ नेताओं को एक आंख नहीं सुहा रहा है। तो ऐसे में उनकी राजनीति को ग्रहण लगाने के तमाम प्रयास चल रहे हैं ,लेकिन अपनी गहरी पैठ और  वरिष्ठ नेता और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी प्रसाद गंगवार का अनुभव निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष रेनू गंगवार की सरलता और युवा नेता कृतज्ञ गंगवार कि युवाओं में लोकप्रियता ने गंगवार परिवार को एक बार फिर मजबूत स्थिति में लाकर खड़ा किया है। ऐसे में गंगवार परिवार से नाराज चल रहे नेताओं को मना पाने में गंगवार परिवार कितना कामयाब रहता है।  यह एक बड़ा सवाल है तो वही गंगवार परिवार के बढ़ते हुए वर्चस्व को तराई के नेता कैसे स्वीकार करेंगे यह एक और बड़ा सवाल है । ऐसे में दोनों धड़ों में से यदि कोई भी नाराज होता है तो फिर भाजपा की स्थिति डगमग हो सकती है और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के आए परिणामों से भाजपा वैसे ही परेशान नजर आ रही है ।  वहीं कांग्रेस इसको संजीवनी मान रही है क्योंकि यह त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। इस चुनाव से पहले कौन ? आने वाले समय का सरताज है, यह तय हो रहा है, साथ ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आखिर राजनीति का ऊंट किस करवट बैठने वाला है। किसको जनता का समर्थन और प्यार मिलने वाला है और किसकी राजनीतिक बुनियादें हिलने वाली हैं। तराई से गरमाई राजनीति कुमाऊं और गढ़वाल होते हुए देहरादून की कुर्सी पर किसको अपना सरताज चुनेगी। सभी की निगाहें इसी तरफ टक टकी लगाकर देखने लगी हैं।