हाईकोर्ट कॉम्प्लेक्स के लिए 73 हेक्टेयर वन भूमि में से 40 हेक्टेयर हस्तांतरण को कैबिनेट की मंजूरी लामाचौड़ के बेलबाबा मंदिर के पास प्रस्तावित स्थल को हाईकोर्ट ने बताया उपयुक्त, नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्टिंग की दिशा में बड़ा कदम

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हाईकोर्ट कॉम्प्लेक्स के लिए 73 हेक्टेयर वन भूमि में से 40 हेक्टेयर हस्तांतरण को कैबिनेट की मंजूरी


लामाचौड़ के बेलबाबा मंदिर के पास प्रस्तावित स्थल को हाईकोर्ट ने बताया उपयुक्त, नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्टिंग की दिशा में बड़ा कदम

हल्द्वानी। उत्तराखंड सरकार ने नैनीताल स्थित मा. उच्च न्यायालय के स्थायी स्थानांतरण के लिए हल्द्वानी के लामाचौड़ क्षेत्र में वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है। मंत्रिमंडल ने तराई पूर्वी वन प्रभाग, रुद्रपुर के भाखड़ा रेंज अंतर्गत लामाचौड़ में स्थित कुल 73 हेक्टेयर वन भूमि में से आवश्यकता के अनुसार 40 हेक्टेयर भूमि मा. उच्च न्यायालय, उत्तराखंड को हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
दरअसल, मंत्रिमंडल की 31 मई 2023 को हुई बैठक में मा. उच्च न्यायालय, उत्तराखंड नैनीताल को नैनीताल से स्थायी रूप से हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में स्थानांतरित किए जाने का निर्णय लिया गया था। उस समय उच्च न्यायालय के लिए 26.08 हेक्टेयर वन भूमि चयनित की गई थी।
बाद में जिलाधिकारी नैनीताल की स्थल निरीक्षण आख्या के आधार पर उच्च न्यायालय ने तराई पूर्वी वन प्रभाग, रुद्रपुर के भाखड़ा रेंज के लामाचौड़ ब्लॉक के प्लॉट संख्या 46 और 47 में बेलबाबा मंदिर के समीप स्थित भूमि का निरीक्षण किया। यहां क्रमशः 36 और 37 हेक्टेयर, कुल 73 हेक्टेयर वन भूमि उपलब्ध है। यह भूमि हल्द्वानी-रुद्रपुर राजमार्ग संख्या-05 से लगी हुई है।
उच्च न्यायालय द्वारा उक्त स्थल को हाईकोर्ट कॉम्प्लेक्स के लिए उपयुक्त बताते हुए कुल 73 हेक्टेयर में से वर्तमान आवश्यकता के अनुसार 40 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरित किए जाने का अनुरोध किया गया था।
इसी प्रस्ताव के आधार पर मंत्रिमंडल ने 73 हेक्टेयर वन भूमि में से यथाआवश्यक 40 हेक्टेयर भूमि मा. उच्च न्यायालय, उत्तराखंड को हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी।
सरकार के इस निर्णय को नैनीताल से उच्च न्यायालय परिसर को हल्द्वानी स्थानांतरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रस्तावित स्थल हल्द्वानी-रुद्रपुर मार्ग से जुड़ा होने के कारण भविष्य में न्यायालय परिसर के लिए बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।