रुद्रपुर में भाकपा(माले) का प्रदर्शन, पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच की मांग, धामी सरकार को इस्तीफे की चुनौती।     

खबरें शेयर करें -

रुद्रपुर में भाकपा(माले) का प्रदर्शन, पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच की मांग, धामी सरकार को इस्तीफे की चुनौती।           रुद्रपुर, 28 सितंबर। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) पेपर लीक मामले को लेकर भाकपा(माले) ने रविवार को रुद्रपुर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने अंबेडकर चौक के पास प्रदेश सरकार का पुतला दहन करते हुए सीबीआई जांच की मांग उठाई और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व आयोग के जिम्मेदार पदाधिकारियों से इस्तीफे की मांग की।प्रदर्शन के दौरान भाकपा(माले) नेता ललित मटियाली ने कहा कि परीक्षा शुरू होने के महज आधे घंटे के अंदर प्रश्नपत्र का सोशल मीडिया पर आना सरकार और यूकेएसएसएससी की निष्पक्ष परीक्षा कराने की नीयत और व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सख्त नकल विरोधी कानून के बावजूद सरकार नकल माफियाओं पर रोक लगाने में विफल साबित हुई है। ऐसे में राज्य सरकार को इस्तीफा देकर युवाओं से माफी मांगनी चाहिए।अमनदीप कौर ने आयोग के अध्यक्ष जी.एस. मर्तोलिया पर निशाना साधते हुए कहा कि अपनी नाकामी स्वीकार करने के बजाय वह तकनीकी परिभाषाओं में उलझाकर युवाओं को गुमराह कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि लाखों प्रतियोगी छात्र-छात्राओं ने ईमानदारी से तैयारी की, लेकिन परीक्षा प्रक्रिया बार-बार नकल माफियाओं के कब्जे में जाकर ध्वस्त हो रही है, जो बेहद शर्मनाक है।भाकपा(माले) की मांग है कि आयोग के अध्यक्ष और सचिव को तत्काल पद से हटाया जाए और केवल वर्तमान ही नहीं बल्कि पिछले 25 वर्षों में यूकेएसएसएससी से लेकर विधानसभा तक हुई तमाम भर्तियों की जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में सीबीआई से करवाई जाए।इस मौके पर ज्ञानी सुरेन सिंह, सुगंधा, आइसा नेता धीरज कुमार, अनिता अन्ना, मनीष कुमार, रानी कुमारी, विजय शर्मा, रंजन विश्वास, कमलेश कार्की समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।पेपर लीक मामले की ताजा अपडेटदेहरादून एवं अन्य जिलों में भी विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा आंदोलन तेज कर दिया गया है और परीक्षार्थी भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर नए सिरे से पारदर्शी परीक्षा कराने पर जोर दे रहे हैं।आयोग ने फिलहाल पेपर लीक की पुष्टि से इनकार करते हुए इसे तकनीकी भ्रम बताया है, लेकिन प्रमाण सोशल मीडिया पर वायरल होने से विवाद गहराता जा रहा है।विपक्षी दलों ने भी पूरे मामले में सरकार और आयोग को कटघरे में खड़ा करते हुए विधानसभा में मुद्दा उठाने की तैयारी शुरू कर दी है।बेरोजगार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सीबीआई जांच की घोषणा नहीं होती, तो राज्यव्यापी चक्का जाम और बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।